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झारखंड: मैट्रिक-इंटर परीक्षा फॉर्म के लिए पेन और यू-डाइस कोड अनिवार्य, डुप्लीकेट पंजीयन पर लगेगी रोक

Wed, 14 Oct 2026 03:56 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: शबाहत हुसैन Updated Wed, 14 Oct 2026 03:56 PM IST
सार

झारखंड एकेडमिक काउंसिल 2027 की मैट्रिक, इंटर, मध्यमा और मदरसा परीक्षाओं के लिए पेन और यू-डाइस कोड अनिवार्य करेगा। दुर्गापूजा के बाद फॉर्म भरने की प्रक्रिया शुरू होगी। इस बार करीब आठ लाख परीक्षार्थियों के शामिल होने का अनुमान है।

 

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Pen and U-DISE code mandatory for Matric and Intermediate exam forms; duplicate registrations to be curbed.
झारखंड एकेडमिक काउंसिल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) की ओर से वर्ष 2027 की मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए फॉर्म भरने की प्रक्रिया दुर्गापूजा के बाद शुरू की जाएगी। इसके लिए काउंसिल आवश्यक तैयारियां पूरी करने में जुटा है। राज्यभर के स्कूलों से विद्यार्थियों से संबंधित आवश्यक जानकारी और आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। इस बार मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में करीब आठ लाख परीक्षार्थियों के शामिल होने की संभावना है। परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और डुप्लीकेट पंजीयन पर रोक लगाने के लिए काउंसिल ने पंजीयन और परीक्षा फॉर्म भरने के नियमों में बदलाव किया है।

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पेन और यू-डाइस कोड देना अनिवार्य
काउंसिल ने वर्ष 2027 की मैट्रिक, इंटरमीडिएट, मध्यमा और मदरसा परीक्षाओं के लिए पंजीयन और परीक्षा फॉर्म भरने की प्रक्रिया में परमानेंट एजुकेशन नंबर (पेन) और यू-डाइस कोड अनिवार्य कर दिया है। इस संबंध में राज्य के सभी विद्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। निर्धारित पहचान संबंधी जानकारियों के बिना विद्यार्थियों का पंजीयन या परीक्षा फॉर्म स्वीकार नहीं किया जाएगा। स्कूलों को फॉर्म भरने से पहले विद्यार्थियों की पहचान और उनसे संबंधित विवरणों की जांच करनी होगी। इस व्यवस्था से पंजीयन के दौरान होने वाली गड़बड़ियों और मानवीय त्रुटियों को कम करने में मदद मिलेगी।

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एकीकृत शैक्षणिक डाटाबेस तैयार करने की तैयारी
पेन और यू-डाइस कोड अनिवार्य करने का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के दोहरे पंजीयन की समस्या पर रोक लगाना है। नई व्यवस्था से विद्यार्थियों का एकीकृत शैक्षणिक डाटाबेस तैयार करने में मदद मिलेगी। इससे उनकी पहचान, नामांकन की स्थिति और पिछले शैक्षणिक रिकॉर्ड का मिलान करना आसान होगा। साथ ही, राज्य के विद्यालयों में नामांकित विद्यार्थियों और बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या से संबंधित आंकड़ों को अधिक सटीक बनाया जा सकेगा। स्कूल स्तर पर विद्यार्थियों के विवरण का सत्यापन होने से दोहरे आवेदन और अन्य गड़बड़ियों की आशंका कम होगी। इससे परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।

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7.44 लाख से बढ़कर आठ लाख हो सकती है परीक्षार्थियों की संख्या
पिछले वर्ष जैक की मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में करीब 7.44 लाख विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था। इस बार परीक्षार्थियों की संख्या बढ़कर आठ लाख के करीब पहुंचने का अनुमान है। विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि के पीछे स्कूलों में ड्रॉपआउट दर में कमी और अभिभावकों के बीच शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता को प्रमुख कारण माना जा रहा है। इसके अलावा, सरकारी स्कूलों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना भी बच्चों को विद्यालय से जोड़े रखने में मददगार साबित हो रही है। नियमित रूप से स्कूल आने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने से परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या में भी वृद्धि की संभावना है।

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