झारखंड: 25 हजार शिक्षकों की नौकरी पर संकट, टीईटी के खिलाफ 22 अक्टूबर से अनशन
झारखंड के प्रारंभिक विद्यालयों के शिक्षक टीईटी की अनिवार्यता से राहत की मांग को लेकर 22 अक्तूबर से रांची में अनिश्चितकालीन अनशन करेंगे। शिक्षकों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद राज्य के करीब 25 हजार शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।
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झारखंड के प्रारंभिक विद्यालयों के शिक्षक शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से राहत की मांग को लेकर 22 अक्टूबर से रांची में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करेंगे। शिक्षकों का कहना है कि टीईटी की अनिवार्यता के चलते राज्य के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। निश्शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्य किए जाने को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का आदेश आया है। इससे राज्य के करीब 25 हजार शिक्षक सीधे प्रभावित हो रहे हैं।
विधानसभा से प्रस्ताव पारित कराने की मांग
शिक्षकों की मुख्य मांग है कि झारखंड सरकार विधानसभा से शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त करने का प्रस्ताव पारित कराए। संघ का कहना है कि सरकार को तमिलनाडु की तर्ज पर प्रस्ताव लाना चाहिए। इसके बाद इस प्रस्ताव को संसद से निर्णय कराने के लिए भारत सरकार के पास भेजा जाए। इस संबंध में अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा है। संघ ने ज्ञापन के साथ तमिलनाडु सरकार की ओर से पारित किए गए प्रस्ताव की प्रति भी उपलब्ध कराई है, ताकि झारखंड में भी इसी तरह की पहल की जा सके।
सभी मंत्रियों से मिलेगा शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल
अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ की राज्य कार्यकारिणी की रविवार को हुई बैठक में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करने का फैसला लिया गया। संघ ने तय किया है कि आंदोलन के साथ-साथ प्रतिनिधिमंडल राज्य सरकार के सभी मंत्रियों से मुलाकात करेगा और उनके सामने शिक्षकों की मांग रखेगा।
बैठक में संघ के अध्यक्ष अनूप केसरी, महासचिव राम मूर्ति ठाकुर, संगठन महामंत्री असादुल्लाह और कोषाध्यक्ष संतोष कुमार समेत अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। संघ का कहना है कि सरकार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश जारी रहेगी, लेकिन मांग पूरी नहीं होने पर 22 अक्तूबर से अनिश्चितकालीन अनशन किया जाएगा।