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झारखंड: स्थापना दिवस पर आंदोलनकारियों का बड़ा प्रदर्शन, बिरसा चौक पर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन का एलान

Sun, 08 Nov 2026 06:31 AM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: शबाहत हुसैन Updated Sun, 08 Nov 2026 06:31 AM IST
सार

झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा 15 नवंबर को रांची के बिरसा चौक पर 50 हजार रुपये मासिक पेंशन और सरकारी नौकरियों में 100 प्रतिशत भागीदारी की मांग को लेकर आमरण अनशन करेगा। वहीं, चाईबासा उपभोक्ता आयोग ने टाटा एआईजी पर 60 हजार रुपये जुर्माना लगाया।

 

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Jharkhand: Major protest by agitators on Foundation Day; announcement of an indefinite hunger strike
झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा 15 नवंबर को रांची के बिरसा चौक में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन और धरना-प्रदर्शन करेगा। 'उलगुलान एक क्रांति' नाम से होने वाले इस प्रदर्शन के माध्यम से आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे। मुकरीडीह पंचायत भवन में आयोजित पूर्वी सिंहभूम जिला इकाई की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में कोल्हान प्रमंडल समेत विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पहुंचे आंदोलनकारियों ने रांची पहुंचने का निर्णय लिया।

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पेंशन और 100 प्रतिशत नौकरी की मुख्य मांगें

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मोर्चा के संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने कहा कि झारखंड राज्य के निर्माण के लिए आंदोलनकारियों ने संघर्ष और बलिदान दिया है। अबुआ सरकार और अबुआ राज में राज्य के निवासियों को रोजी-रोजगार तथा तमाम सरकारी नौकरियों में पूर्ण अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार सभी आंदोलनकारियों को प्रतिमाह 50,000 रुपये सम्मान पेंशन दे और पेंशन के लिए जेल जाने की बाध्यता समाप्त करे। इसके साथ ही आंदोलनकारियों के बाल-बच्चों के लिए सरकारी नौकरियों में 100 प्रतिशत भागीदारी और रोजगार की गारंटी दी जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं करती, तो 15 नवंबर को रांची में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन और धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

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शहीद निर्मल महतो के सपनों को पूरा करने का संकल्प

विशिष्ट अतिथि और कोल्हान प्रमंडल के अध्यक्ष विश्वजीत प्रामाणिक ने कहा कि शहीद निर्मल महतो ने झारखंड के अस्तित्व, अस्मिता, पहचान, रोजी-रोजगार और नौकरियों में 100 प्रतिशत भागीदारी के लिए शहादत दी थी। उनकी शहादत को बेकार नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 15 नवंबर को कोल्हान प्रमंडल से बड़ी संख्या में आंदोलनकारी रांची पहुंचेंगे और अपने अधिकारों की मांग उठाएंगे। सभा की शुरुआत शहीद निर्मल महतो की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की गई। इस दौरान पूर्वी सिंहभूम के दिवंगत आंदोलनकारी खगेन महतो, अमूल्य महतो और गौर महतो, रामगढ़ के देव नारायण कुमार महतो तथा गुमला की निशा भगत के आकस्मिक निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया गया और श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

स्वास्थ्य बीमा दावा खारिज करने पर टाटा एआईजी पर 60 हजार रुपये जुर्माना
चाईबासा। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, पश्चिमी सिंहभूम ने स्वास्थ्य बीमा का वैध दावा अनुचित आधार पर खारिज करने के मामले में टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड पर 60,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने बीमा कंपनी के इस कदम को सेवा में गंभीर कमी करार दिया है। उपभोक्ता अदालत ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह यह पूरी राशि पीड़ित देवाशीष दत्ता को 45 दिनों की तय समयावधि के भीतर प्रदान करे। यदि कंपनी निर्धारित समय में भुगतान पूरा नहीं करती है, तो उसे दावा खारिज होने की तारीख से चिकित्सा राशि पर नौ प्रतिशत की वार्षिक दर से ब्याज भी चुकाना पड़ेगा।

अनुचित तरीके से दावा निरस्त करने पर फैसला
यह पूरा मामला चाईबासा के यूरोपियन क्वार्टर निवासी देवाशीष दत्ता से जुड़ा है। उन्होंने एक्सिस बैंक की जमशेदपुर शाखा के माध्यम से अपने तथा अपने परिवार के लिए टाटा एआईजी कंपनी से पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा करवाया था। यह पॉलिसी 29 नवंबर, 2024 से 28 नवंबर, 2025 तक , मान्य थी। पॉलिसी की वैधता अवधि के दौरान 18 जुलाई, 2025 को अचानक चक्कर आने, वर्टिगो और जी मिचलाने की गंभीर समस्या होने पर चिकित्सीय सलाह के आधार पर उन्हें टाटा मेन अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल से 21 जुलाई, 2025 को उन्हें डिस्चार्ज किया गया था।

बीमा पॉलिसी और अस्पताल में इलाज का विवरण

अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान बीमित व्यक्ति ने कंपनी से कैशलेस इलाज की सुविधा की अनुमति मांगी थी। हालांकि, कंपनी ने यह तर्क देकर मांग को निरस्त कर दिया कि यह उपचार मरीज को अस्पताल में भर्ती किए बिना भी संभव था। इसके परिणामस्वरूप पीड़ित को इलाज का पूरा खर्च खुद उठाना पड़ा। अस्पताल का खर्च 33,991.80 रुपये और दवाइयों की राशि 11,082 रुपये को मिलाकर कुल चिकित्सा व्यय लगभग 45,000 रुपये आया था।

मधुमेह का आरोप और आयोग का अंतिम फैसला
आयोग में सुनवाई के समय बीमा कंपनी ने पक्ष रखा कि पॉलिसी लेते वक्त उपभोक्ता ने अपनी पुरानी बीमारी यानी मधुमेह की जानकारी छिपाई थी और मांगे जाने पर दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। हालांकि, आयोग ने कंपनी की दलील को पूरी तरह नाकाफी माना। अदालत ने स्पष्ट किया कि जुलाई 2025 के मेडिकल कागजात में मधुमेह का उल्लेख होने से यह साबित नहीं होता कि नवंबर 2024 में बीमा खरीदते वक्त भी शिकायतकर्ता इस बीमारी से ग्रस्त थे। पूर्व बीमारी का आरोप लगाने वाली बीमा कंपनी को यह बात प्रमाण के साथ सिद्ध करनी होती है। पर्याप्त साक्ष्य के बिना दावा खारिज करना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(11) के दायरे में सेवा में कमी है। इसके तहत आयोग ने चिकित्सा व्यय के 45,000 रुपये, मानसिक परेशानी के 10,000 रुपये और वाद व्यय के 5,000 रुपये, मिलाकर कुल 60,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया।

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