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झारखंड: रांची के जलाशयों पर अतिक्रमण को लेकर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, हेमंत सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

Thu, 01 Oct 2026 04:21 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: शबाहत हुसैन Updated Thu, 01 Oct 2026 04:21 PM IST
सार

झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के जल स्रोतों, बड़ा तालाब और प्रमुख डैमों पर अतिक्रमण के मामले में राज्य सरकार से विस्तृत प्रगति रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने एमिकस क्यूरी को स्वतंत्र जांच का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को तय की है।

 

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Jharkhand: Jharkhand High Court takes a tough stance on encroachment of Ranchi water bodies
झारखंड हाईकोर्ट का फैसला,रोनी मंडल की याचिका खारिज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड उच्च न्यायालय ने राजधानी रांची के जल स्रोतों के संरक्षण, ऐतिहासिक बड़ा तालाब की साफ-सफाई तथा शहर के प्रमुख जलाशयों और डैमों के जलग्रहण क्षेत्रों पर हुए अतिक्रमण के मामले में अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले में प्रार्थियों और राज्य सरकार की दलीलें सुनने के बाद हेमंत सरकार को विस्तृत प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार से पूछा है कि पूर्व में जारी किए गए न्यायिक आदेशों के आलोक में अब तक धरातल पर क्या-क्या ठोस और प्रभावी कदम उठाए गए हैं। उच्च न्यायालय ने राज्य प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह की गई कार्रवाई की पूरी जानकारी बिंदुवार और विस्तृत रूप में अगली सुनवाई तक कोर्ट के समक्ष पेश करे। अदालत ने इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं के समूह पर अगली सुनवाई के लिए 29 अक्तूबर 2026 की तिथि तय की है।

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एमिकस क्यूरी को सौंपी गई स्वतंत्र जांच रिपोर्ट की जिम्मेदारी
उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले की सुनवाई करते हुए अदालत का सहयोग कर रहे एमिकस क्यूरी को भी विशेष निर्देश दिए हैं। अदालत ने एमिकस क्यूरी को कहा है कि वे जलाशयों और डैमों की मौजूदा स्थिति का अध्ययन कर अपनी स्वतंत्र जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें। अदालत का मानना है कि स्वतंत्र रिपोर्ट से जमीनी हकीकत की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी। उच्च न्यायालय का मुख्य उद्देश्य रांची शहर के जलाशयों, बड़ा तालाब और प्रमुख डैमों को हर प्रकार के अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराना है। इसके साथ ही जल स्रोतों को स्वच्छ बनाकर शहर के गिरते भूजल स्तर में सुधार लाना भी अदालत की प्राथमिकता में शामिल है।
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पुरानी पानी टंकी हादसे में प्रशासनिक लापरवाही का उठा मुद्दा
मामले की सुनवाई के दौरान एक हस्तक्षेपकर्ता ने अदालत के समक्ष शहर में चल रहे अभियानों और उनसे जुड़ी दुर्घटनाओं का मुद्दा उठाया। हस्तक्षेप करने वाले पक्ष की तरफ से खंडपीठ को अवगत कराया गया कि कोतवाली क्षेत्र के पीछे स्थित पुरानी पानी की टंकी को हटाए जाने के दौरान एक बड़ा और दुखद हादसा हुआ था। इस हादसे में दो मजदूरों की मलबे में दबकर दुखद मौत हो गई थी। हस्तक्षेपकर्ता ने अदालत में दलील दी कि यह दर्दनाक दुर्घटना पूरी तरह से प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है। उच्च न्यायालय ने इस तथ्य को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की गंभीरता को रेखांकित किया।
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तीन अलग-अलग याचिकाओं को एक साथ जोड़कर सुनवाई
राजधानी रांची में लगातार गिरते भूजल स्तर और प्राकृतिक जल स्रोतों की बदहाली को गंभीरता से लेते हुए झारखंड उच्च न्यायालय ने पूर्व में स्वयं संज्ञान लेकर एक जनहित याचिका दर्ज की थी। इसके साथ ही, याचिकाकर्ता खुशबू कटारूका ने ऐतिहासिक बड़ा तालाब की सफाई और उसके जीर्णोद्धार को लेकर अलग से याचिका दाखिल की है। वहीं, याचिकाकर्ता राजीव कुमार सिंह ने कांके डैम, हटिया (धुर्वा) डैम और गेतलसूद डैम के कैचमेंट एरिया तथा इनकी जमीनों पर हुए अवैध अतिक्रमण को हटाने की मांग को लेकर याचिका दायर की है। उच्च न्यायालय इन सभी तीन जनहित याचिकाओं पर एक साथ क्लब करके सुनवाई कर रहा है ताकि रांची के सभी जलाशयों को स्वच्छ और अतिक्रमण मुक्त बनाया जा सके।

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