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झारखंड: जवाब दाखिल करने में देरी पर कड़ा रुख, हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन के पक्ष पर लगाया 10 हजार का जुर्माना
Thu, 01 Oct 2026 04:26 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Thu, 01 Oct 2026 04:26 PM IST
सार
झारखंड हाईकोर्ट ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी अधिनियम के तहत दर्ज मामले में जवाब दाखिल करने में देरी पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पक्ष पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने अगली सुनवाई 2 नवंबर को निर्धारित की है।
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झारखंड हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
झारखंड उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के खिलाफ अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत दर्ज मामले में जवाब दाखिल करने में देरी पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पक्ष पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने बार-बार समय मांगने और जवाब प्रस्तुत करने में विलंब पर कड़ी नाराजगी जताई। उच्च न्यायालय ने प्रतिवादी पक्ष को निर्धारित समय सीमा के भीतर हर हाल में अपना जवाब दाखिल करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 नवंबर की तिथि निर्धारित की है।
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एससी-एसटी थाने में दर्ज प्राथमिकी
यह पूरा कानूनी विवाद जमीन घोटाला मामले की जांच के समय शुरू हुआ था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची के अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति थाने में प्रवर्तन निदेशालय के तत्कालीन अधिकारी कपिल राज और अन्य अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया था कि जांच अधिकारियों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए उनका मानसिक उत्पीड़न किया और उनके अधिकारों का हनन किया। इस कार्रवाई के विरोध में प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने उच्च न्यायालय का रुख किया था। अधिकारियों ने याचिका दाखिल करके अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और एससी-एसटी अधिनियम के तहत शुरू की गई कानूनी कार्रवाई को रद्द करने की मांग की थी।
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अनावश्यक विलंब स्वीकार्य नहीं
उच्च न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पक्ष की ओर से अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया गया। अदालत ने जवाब दाखिल करने में हो रही देरी पर असंतोष व्यक्त करते हुए कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब स्वीकार्य नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने प्रतिवादी पक्ष पर 10,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना लगाते हुए अगली तिथि से पहले अनिवार्य रूप से जवाब दाखिल करने का आदेश जारी किया।
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मामले की अगली सुनवाई की तिथि तय
उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि सभी संबंधित पक्ष अपनी ओर से आवश्यक दस्तावेज और जवाब समय पर पूरे कर लें। अदालत 2 नवंबर को इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई करेगी। प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने अपनी याचिका में कहा है कि जमीन घोटाले की जांच को बाधित करने के उद्देश्य से उनके खिलाफ यह मामला दर्ज कराया गया था। अदालत अब 2 नवंबर को दोनों पक्षों की कानूनी दलीलों पर आगे विचार करेगी।