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झारखंड: थानों में सीसीटीवी न लगाने पर हाईकोर्ट हुआ सख्त, शीर्ष अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी

Thu, 24 Sep 2026 06:38 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: शबाहत हुसैन Updated Thu, 24 Sep 2026 06:38 PM IST
सार

झारखंड हाईकोर्ट ने थानों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए जाने पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। अदालत ने अनुपालन में देरी और टेंडर प्रक्रिया पर नाराजगी जताई।

 

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Jharkhand: High Court gets tough over failure to install CCTV cameras in police stations.
झारखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के पुलिस थानों में सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद भी सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए जाने पर सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए मौखिक टिप्पणी की कि सरकार अदालती आदेशों का पालन करने के बजाय अपने शपथ पत्रों में वास्तविक स्थिति छिपाकर मामले को टालने का प्रयास कर रही है।

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प्रताड़ना मामले में स्वतः संज्ञान
यह मामला ईचागढ़ पुलिस हिरासत में एक गिरफ्तार व्यक्ति को प्रताड़ित किए जाने की घटना से संबंधित है। झारखंड हाईकोर्ट ने इस घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था। इसके बाद से ही अदालत पूरे राज्य के सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने के निर्देशों के अनुपालन की निरंतर निगरानी कर रही है।
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हिरासत में मौतों पर जताई चिंता
खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्ष 2018 के बाद से अब तक राज्य में पुलिस हिरासत में मौत के 450 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। इसके बाद भी, पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे न लगाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण विषय है। अदालत ने कहा कि हिरासत में ऐसी घटनाओं को रोकने, पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और पुलिस प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाया जाना बहुत आवश्यक है।
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टेंडर प्रक्रिया निष्फल रहने पर सवाल
सुनवाई में अदालत ने इस पर भी गहरा असंतोष प्रकट किया कि थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए चार बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन इसके बाद भी अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया। खंडपीठ ने पुलिस महानिदेशक द्वारा इसकी जिम्मेदारी गृह विभाग पर डालने को गैर-जिम्मेदाराना आचरण बताया। इस दौरान पुलिस महानिदेशक खुद अदालत के समक्ष उपस्थित थीं।

अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी
अदालत ने कहा कि वर्तमान हालात को देखते हुए मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक के विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई आरंभ करना ही एकमात्र विकल्प प्रतीत होता है। हालांकि, खंडपीठ ने कोई भी अंतिम कदम उठाने से पूर्व तीनों वरिष्ठ अधिकारियों को अपना स्पष्टीकरण दाखिल करने का अवसर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्तूबर को निर्धारित की गई है, जिसमें अधिकारियों के जवाब और वास्तविक प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

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