{"_id":"6a2235d687a5bdc6240f2d51","slug":"grand-alliance-formula-finalised-for-two-rajya-sabha-seats-names-of-pranav-jha-and-anjani-soren-finalised-ranchi-news-c-1-1-noi1475-4360886-2026-06-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jharkhand News: राज्यसभा की दो सीटों पर महागठबंधन का फॉर्मूला तय! प्रणव झा और अंजनी सोरेन के नाम पर मुहर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jharkhand News: राज्यसभा की दो सीटों पर महागठबंधन का फॉर्मूला तय! प्रणव झा और अंजनी सोरेन के नाम पर मुहर
Fri, 05 Jun 2026 02:02 PM IST
राँची ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jun 2026 02:02 PM IST
सार
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर महागठबंधन ने उम्मीदवारों के नाम लगभग तय कर लिए हैं। सूत्रों के अनुसार, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने शिबू सोरेन की पुत्री अंजनी सोरेन को उम्मीदवार बनाने का फैसला किया है, जबकि कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता प्रणव झा के नाम पर सहमति बनी है।
विज्ञापन
अंजनी सोरेन और प्रणव झा के नाम पर बनी सहमति
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। महागठबंधन के भीतर उम्मीदवारों के नामों पर लगभग सहमति बन चुकी है। सूत्रों के अनुसार, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने पार्टी संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की पुत्री अंजनी सोरेन को उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया है। वहीं कांग्रेस की ओर से बोकारो निवासी वरिष्ठ नेता प्रणव झा के नाम पर सहमति बनी है। हालांकि दोनों दलों की ओर से अभी तक उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। माना जा रहा है कि 5 या 6 जून को नामों का औपचारिक ऐलान किया जा सकता है।
कांग्रेस में प्रणव झा के नाम पर केंद्रीय नेतृत्व की सहमति
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के करीबी माने जाने वाले प्रणव झा के नाम पर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने मुहर लगा दी है। कांग्रेस के भीतर उनके नाम को लेकर सहमति बनने के बाद अब औपचारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि अंजनी सोरेन को उम्मीदवार बनाए जाने को झामुमो के भीतर संगठनात्मक और राजनीतिक संतुलन के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला पार्टी के भविष्य की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती से भी जुड़ा हुआ है।
भाजपा ने अब तक नहीं खोले पत्ते
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं किया है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए परिमल नाथवानी पर दांव लगा सकती है। फिलहाल पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।
विज्ञापन
भाजपा की रणनीति पर टिकी निगाहें
झारखंड में राज्यसभा चुनावों का इतिहास कई बार रोचक रहा है। यहां क्रॉस वोटिंग और बदलते राजनीतिक समीकरणों को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में महागठबंधन की ओर से उम्मीदवारों के नाम लगभग तय होने के बाद अब सभी की निगाहें भाजपा की रणनीति और उसके उम्मीदवार पर टिकी हुई हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एक सीट पर महागठबंधन की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है। वहीं दूसरी सीट को लेकर चुनावी गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। नामांकन प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ 5 और 6 जून तक तस्वीर और अधिक स्पष्ट होने की संभावना जताई जा रही है। राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच रणनीतिक बैठकों और चर्चाओं का दौर लगातार जारी है।
विज्ञापन
कांग्रेस में प्रणव झा के नाम पर केंद्रीय नेतृत्व की सहमति
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के करीबी माने जाने वाले प्रणव झा के नाम पर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने मुहर लगा दी है। कांग्रेस के भीतर उनके नाम को लेकर सहमति बनने के बाद अब औपचारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि अंजनी सोरेन को उम्मीदवार बनाए जाने को झामुमो के भीतर संगठनात्मक और राजनीतिक संतुलन के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला पार्टी के भविष्य की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती से भी जुड़ा हुआ है।
विज्ञापन
भाजपा ने अब तक नहीं खोले पत्ते
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं किया है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए परिमल नाथवानी पर दांव लगा सकती है। फिलहाल पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।
विज्ञापन
भाजपा की रणनीति पर टिकी निगाहें
झारखंड में राज्यसभा चुनावों का इतिहास कई बार रोचक रहा है। यहां क्रॉस वोटिंग और बदलते राजनीतिक समीकरणों को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में महागठबंधन की ओर से उम्मीदवारों के नाम लगभग तय होने के बाद अब सभी की निगाहें भाजपा की रणनीति और उसके उम्मीदवार पर टिकी हुई हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एक सीट पर महागठबंधन की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है। वहीं दूसरी सीट को लेकर चुनावी गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। नामांकन प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ 5 और 6 जून तक तस्वीर और अधिक स्पष्ट होने की संभावना जताई जा रही है। राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच रणनीतिक बैठकों और चर्चाओं का दौर लगातार जारी है।