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धनबाद: टाटा स्टील की मुश्किलें बढ़ीं! माडा के शुल्क नोटिस पर हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत, अब देना होगा जवाब

Sun, 08 Nov 2026 06:31 AM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: शबाहत हुसैन Updated Sun, 08 Nov 2026 06:31 AM IST
सार

झारखंड हाईकोर्ट ने टाटा स्टील को माडा के बाजार शुल्क नोटिस पर सीधे राहत देने से इन्कार कर दिया। अदालत ने कंपनी को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने और पहले संबंधित प्राधिकरण के समक्ष आपत्ति दर्ज कराने का निर्देश दिया।

 

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Dhanbad: Tata Steel’s troubles mount! High Court grants no relief against MADA’s fee notice
झारखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड उच्च न्यायालय ने धनबाद की मिनरल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (माडा) द्वारा टाटा स्टील को जारी बाजार शुल्क के नोटिस से जुड़े मामले में सीधे हस्तक्षेप करने से साफ इन्कार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कंपनी को सीधे अदालती राहत न देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि किसी प्रशासनिक संस्था से केवल कारण बताओ नोटिस मिलने भर से सीधे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना कानूनी प्रक्रिया के दृष्टिकोण से उचित नहीं है।

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प्रशासनिक नोटिस पर अदालत का रुख
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब तक कोई नोटिस पूरी तरह से कानून और अधिकार क्षेत्र से बाहर न हो, तब तक पक्षकार को अदालत आने के बजाय पहले संबंधित प्राधिकरण के समक्ष ही अपनी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए। टाटा स्टील ने अपनी दलील में आशंका जताई थी कि माडा ने पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर यह तय कर लिया है कि कंपनी को शुल्क चुकाना ही होगा। अदालत ने कंपनी की इस दलील को अस्वीकार करते हुए कहा कि नोटिस में शुल्क निर्धारण की बात कहना केवल एक प्रारंभिक प्रशासनिक राय है, न कि कोई अंतिम निर्णय। प्राधिकरण ने कंपनी को अपना पक्ष रखने और सुनवाई का पूरा तथा निष्पक्ष अवसर दिया है।

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बाजार शुल्क विवाद का पूरा मामला
यह पूरा मामला 31 मार्च, 2017 का है, जब माडा ने मार्केट फीस नियमावली 2010 के तहत टाटा स्टील को शुल्क वसूली का नोटिस भेजा था। कंपनी की ओर से कहा गया था कि 32 गांवों में फैली उसकी कोयला खदानें तो नियमावली के दायरे में आती हैं, लेकिन धनबाद नगर निगम क्षेत्र में स्थित उसके दो प्रसंस्करण संयंत्रों पर यह शुल्क लागू नहीं किया जा सकता। इस आधार पर कंपनी ने माडा के क्षेत्राधिकार को चुनौती दी थी।

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जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह

उच्च न्यायालय ने प्रकरण के कानूनी पहलुओं पर कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना टाटा स्टील को नोटिस का औपचारिक और विस्तृत जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया कि कंपनी प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र से संबंधित अपने तमाम कानूनी तर्कों तथा बचाव के बिंदुओं को माडा के सामने रख सकती है। प्राधिकरण को भी सुनिश्चित करना होगा कि वह स्थापित कानूनी प्रावधानों और नियमों के अनुरूप ही इस मामले में निष्पक्ष निर्णय ले।

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