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दो साल पहले स्टेशन पर छूटा मासूम: आधार कार्ड और वीडियो कॉल से ऐसे मिला मां का ठिकाना; जानें पूरा मामला

Wed, 16 Sep 2026 04:47 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: हिमांशु सिंह बघेल Updated Wed, 16 Sep 2026 04:47 PM IST
सार

धनबाद में करीब दो साल से बाल संरक्षण केंद्र में रह रहे बच्चे को आखिरकार उसकी मां से मिला दिया गया। रेलवे पुलिस ने सितंबर 2024 में बच्चे को स्टेशन परिसर से रेस्क्यू किया था। आधार कार्ड में दर्ज मोबाइल नंबर और पते के जरिए परिवार का पता चला। 

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Dhanbad six Year Old Boy Reunited with Mother After two Years Thanks to Aadhaar and Video Call
धनबाद आरपीएफ - फोटो : Social Media

विस्तार

धनबाद रेलवे थाना पुलिस की ओर से दो साल पहले रेस्क्यू किए गए करीब छह-सात साल के बच्चे को बाल कल्याण समिति की पहल पर आखिरकार उसकी मां को सौंप दिया गया है। दो साल से बिछड़े बेटे को अपनी गोद में पाकर मां खुशी से झूम उठी और दोनों एक-दूसरे से गले मिलकर मुस्कुरा उठे। बच्चे की सुरक्षित घर वापसी कराने के लिए बाल कल्याण समिति और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम लगातार प्रयासरत थीं। परिवार की पहचान की पुष्टि होने के बाद हस्तांतरण की पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए बच्चे को उसकी मां के हवाले कर दिया गया।
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रेलवे पुलिस ने किया था रेस्क्यू
13 सितंबर 2024 को रेलवे थाना पुलिस ने स्टेशन परिसर से करीब छह से सात वर्ष की उम्र वाले इस बच्चे को सुरक्षित बचाया था। रेस्क्यू करने के तुरंत बाद चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से बच्चे को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। समिति के आदेश पर बच्चे को बाल संरक्षण केंद्र में रहने के लिए भेजा गया, जहां वह पिछले लगभग दो साल से रह रहा था। इस दौरान बाल कल्याण समिति और संरक्षण केंद्र के कर्मी लगातार बच्चे के वास्तविक परिवार और घर के पते को ढूंढने की कोशिशों में लगे हुए थे।
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आधार कार्ड से मिली सफलता
बाल कल्याण समिति की सदस्य ममता अरोड़ा ने बताया कि जांच के शुरुआती चरण में बच्चे के संबंध में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद का पता सामने आया था। हालांकि, बाद में जब बच्चे के आधार विवरण की गहन जांच की गई, तो बच्चे की मां का चालू मोबाइल नंबर और मध्यप्रदेश के मुरैना जिले का स्थायी पता प्राप्त हुआ। जब उस मोबाइल नंबर पर संपर्क साधा गया, तो ज्ञात हुआ कि पूरा परिवार काम और मजदूरी के सिलसिले में वहां से स्थानांतरित होकर उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले स्थित वृंदावन चला गया है।
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वीडियो कॉल से पक्की हुई पहचान
वृंदावन में स्थानीय पार्षद और अन्य निवासियों के सहयोग से बच्चे की मां की खोज पूरी की गई। इसके बाद धनबाद में मौजूद बाल कल्याण समिति ने इंटरनेट के माध्यम से वीडियो कॉल कर मां और बच्चे को आमने-सामने कराया, जिससे दोनों की पहचान की पूरी पुष्टि हो गई। पहचान पक्की होने पर जेजे एक्ट की धारा 95 के तहत हस्तांतरण की सभी वैधानिक औपचारिकताएं पूर्ण करके बच्चे को उसकी मां को सौंप दिया गया। बच्चे के पिता का पहले ही देहांत हो चुका है।
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