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Jharkhand: बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में महिला कैदी के गर्भवती होने का मामला, काराधीक्षक पर यौन शोषण का आरोप

Sun, 17 May 2026 10:36 PM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: राँची ब्यूरो Updated Sun, 17 May 2026 10:36 PM IST
सार

जेल में बंद एक महिला कैदी ने आरोप लगाया है कि उसके साथ लगातार शारीरिक और मानसिक शोषण किया गया। बाद में उसके गर्भवती होने की बात सामने आने पर मामला और संवेदनशील हो गया। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी x पर पोस्ट कर सरकार को दी जानकारी

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Case of pregnancy of a female prisoner in Birsa Munda Central Jail allegation against the jail superintendent
अपराध - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में एक महिला कैदी के कथित यौन शोषण और गर्भवती होने का मामला सामने आने के बाद जेल प्रशासन और राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप जेल अधीक्षक स्तर के अधिकारी पर लगे हैं, जिससे पूरे मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
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जानकारी के अनुसार, जेल में बंद एक महिला कैदी ने आरोप लगाया है कि उसके साथ लगातार शारीरिक और मानसिक शोषण किया गया। बाद में उसके गर्भवती होने की बात सामने आने पर मामला और संवेदनशील हो गया। इस पूरे प्रकरण को लेकर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर सरकार और जेल प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।
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सूत्रों के मुताबिक, घटना सामने आने के बाद तत्काल कार्रवाई के बजाय कुछ अधिकारियों द्वारा मामले को दबाने की कोशिश किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि महिला कैदी को स्वास्थ्य जांच और इलाज के नाम पर कई बार जेल से बाहर ले जाया गया। आरोप यह भी है कि ऐसा संभावित मेडिकल साक्ष्यों और सबूतों को प्रभावित करने के उद्देश्य से किया गया, हालांकि इन दावों की अब तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
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मामले को और गंभीर तब माना जा रहा है जब जेल से जुड़े कुछ कर्मचारियों और संभावित गवाहों के अचानक तबादले की चर्चा भी सामने आई। इससे पूरे घटनाक्रम को लेकर संदेह और गहरा गया है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है।

यह मामला राज्य की जेल सुरक्षा व्यवस्था, महिला कैदियों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर बहस छेड़ रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि यदि जेल जैसी उच्च सुरक्षा वाली जगह पर इस तरह के आरोप सामने आते हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल राज्य सरकार और जेल प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है। वहीं राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वे किसी भी पद पर हों।
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