रांची के मिशनरी से गायब बच्चों के मामले में 120 अवांछित माताओं की खोज में जुटी पुलिस
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झारखंड मिशनरीज ऑफ चैरिटी से बच्चे बेचे जाने का मामला सुलझाना पुलिस की बड़ी चुनौती बन गया है। रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस ने सिस्टर कंसोलिया और इंदवार को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने का आवेदन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट स्वयंभू की अदालत में दिया था जो उन्होंने स्वीकार कर लिया। मामले में पुलिस 120 अवांछित माताओं को ट्रैक करने की कोशिश कर रही है जिससे इस मामले का बड़ा साजिशकर्ता हाथ लगे।
इससे पहले इंडियन बिशप्स कांफ्रेंस के महासचिव बिशप थियोडोर मैस्करेनस ने यहां दावा किया था कि मिशनरीज आफ चैरिटी बच्चों की खरीद-फरोख्त से जुड़े रैकेट में शामिल नहीं है और यदि कोई एक सिस्टर इस मामले में दोषी भी है तो उसकी गलती के लिए पूरी मिशनरी को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए।
बिशप ने कहा, 'इस मामले में गिरफ्तार सिस्टर कॉनसालिया ने अपने वकील को बताया कि वह बच्चों को बेचने में कहीं से भी शामिल नहीं है। सिस्टर ने दावा किया कि पुलिस ने दबाव में यह बयान लिया है कि उन्होंने बच्चों को बेचा था।’ मैस्करेनस ने दावा किया कि ऐसे में इस मामले में मिशनरीज की कहीं कोई भूमिका नहीं है। झारखंड सरकार की ओर अंगुली उठाते हुए बिशप ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई एकतरफा है।
इस पर बिशप के दावों का खंडन करते हुए रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनीश गुप्ता ने कहा, ‘इंडियन बिशप्स कॉन्फ्रेंस के महासचिव बिशप थियोडोर मैस्करेनस का बयान पूरी तरह गलत और बेबुनियाद है। पुलिस ने बच्चों को बेचे जाने के मामले में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की सिस्टर कंसोलिया को गिरफ्तार करने के बाद उसके बयान और उससे मिली सूचनाओं के आधार पर ही चार बच्चों में से तीन को विभिन्न स्थानों से बचाया गया है।’
बता दें कि चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की रांची इकाई की अध्यक्ष रूपा वर्मा की शिकायत के आधार पर अनिमा इंदवार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, बच्चा बेचने के लिए 1.20 लाख रुपये तक लिए गए। रूपा वर्मा की शिकायत के मुताबिक, अनिमा ने उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की एक दंपती को बच्चा बेचा था। इस मामले में एक व्यक्ति को बुधवार को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है। इसमें कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। मामले में डीएसपी श्यामानंद मंडल ने कहा कि चैरिटी की तीन महिलाकर्मियों ने चार बच्चों को बेचा है, जिसमें तीन झारखंड में और एक बच्चा उत्तर प्रदेश में बेचा है। आगे की जांच प्रक्रिया चल रही है।
रांची के ईस्ट जेल रोड की मिशनरी 'निर्मल हृदय' से बच्चों की बिक्री का मामला अब देशव्यापी मानव तस्करी का पर्दाफाश कर रहा है। झारखंड ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, केरल, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में बच्चों को बेचने की बात सामने आ रही है।
'निर्मल हृदय' का काला सच
बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी), जिला समाज कल्याण अधिकारी (डीएसडब्ल्यूओ), पुलिस और अन्य अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि निर्मल हृदय में रहीं पीड़िताओं से जन्मे और शिशु भवन में रखे गए 280 बच्चों का कोई अता-पता नहीं है।
अब तक की जांच के दौरान जब्त किए गए कागजात के अनुसार 2015 से 2018 तक उक्त दोनों जगहों (निर्मल हृदय, शिशु भवन) में 450 गर्भवती पीड़िताओं को भर्ती कराया गया। इनसे जन्मे 170 बच्चों को सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत किया गया या जानकारी दी गई। शेष 280 बच्चों का कोई अता-पता नहीं है।