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Jharkhand: 'दवा दुकानों को फार्मासिस्टों के बिना संचालित करने के आदेश को वापस ले सरकार', पीसीआई ने किया आग्रह

Thu, 06 Jul 2023 01:58 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 06 Jul 2023 01:58 PM IST
सार

झारखंड सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिना फार्मासिस्ट के ही दवा दुकानें को खोलने का निर्णय लिया था। वहीं इस निर्णय को फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने झारखंड सरकार से वापस लेने को कहा है।

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PCI urges government to withdraw order to operate drug stores without pharmacists
मेडिकल स्टोर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिना फार्मासिस्ट के ही दवा दुकानें को खोलने का निर्णय लिया था। वहीं इस निर्णय को फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने झारखंड सरकार से वापस लेने को कहा है। इसको लेकर पीसीआई अध्यक्ष डॉ. मोंटू कुमार पटेल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता को इस बारे में पत्र लिखा है।

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पीसीआई अध्यक्ष पटेल ने कहा कि अतीत में फार्मेसी में कोई ज्ञान या शिक्षा नहीं रखने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा फार्मेसी के पेशे का अभ्यास करने पर कोई प्रतिबंध नहीं था। लेकिन इस तरह की अनियमित प्रथा से लोगों के स्वास्थ्य को बहुत नुकसान हुआ और इसे ध्यान में रखते हुए, फार्मेसी के पेशे और अभ्यास को विनियमित करने के लिए फार्मेसी अधिनियम, 1948 बनाया गया था। 
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आगे उन्होंने कहा कि सरकार का यह आदेश पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन की अधिसूचना फार्मेसी अधिनियम 1948 और फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन 2015 का उल्लंघन है। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि सरकार हालिया अधिसूचना को वापस ले और जनहित में झारखंड में फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन, 2015 लागू करें।
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पीसीआई (फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया) भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है और फार्मेसी अधिनियम, 1948 की रक्षा करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।


पीसीआई अध्यक्ष डॉ. मोंटू कुमार पटेल ने कहा कि फार्मेसी अधिनियम की धारा 42 में कहा गया है कि पंजीकृत फार्मासिस्ट के अलावा कोई भी व्यक्ति चिकित्सक के नुस्खे पर किसी भी दवा को मिश्रित, तैयार, मिश्रण या वितरित नहीं करेगा और जो कोई भी इसका उल्लंघन करता है, वह छह महीने की सजा के लिए उत्तरदायी है या जुर्माना एक हजार रुपये से या इससे अधिक देना होगा।

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