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Pahalgam Attack: माता-पिता को वैष्णो देवी दर्शन कराने को बोला था मनीष, एयरपोर्ट पहुंचे दोस्त ने बताई कहानी

Thu, 24 Apr 2025 02:06 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: अरविंद कुमार Updated Thu, 24 Apr 2025 02:06 PM IST
सार

Pahalgram Terror Attack: मनीष रंजन छुट्टी से लौटने के बाद अपने माता-पिता को वैष्णो देवी ले जाने की योजना बनाया था। यह बातें मनीष का शव लेने रांची एयरपोर्ट पहुंचे उसके एक दोस्त ने बताई।

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Pahalgam Attack Manish Ranjan had asked his parents to visit Vaishno Devi his friend told story Ranchi airport
मनीष रंजन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में शहीद हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी मनीष रंजन ने इस छुट्टी से लौटने के बाद अपने माता-पिता को वैष्णो देवी मंदिर ले जाने की योजना बनाई थी।उनके एक मित्र ने यह बात बताई है।

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बता दें कि गुरुवार सुबह रंजन के पार्थिव शरीर को लेने रांची एयरपोर्ट पर मौजूद संजीव कुमार गुप्ता ने कहा कि वह एक मेधावी छात्र थे। उनके पिता हाल ही में झालदा में हिंदी हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। रंजन ने इस छुट्टी के बाद अपने माता-पिता को वैष्णो देवी ले जाने की योजना बनाई थी। हैदराबाद में तैनात आईबी के सेक्शन ऑफिसर रंजन मंगलवार को हुए आतंकी हमले में मारे गए 26 लोगों में शामिल थे।
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पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के झालदा में उनके पैतृक स्थान पर उनके पार्थिव शरीर को ले जाने के लिए रांची एयरपोर्ट आए उनके एक अन्य मित्र आदित्य शर्मा ने कहा, हमने कभी नहीं सोचा था कि ऐसी वीभत्स घटना घटेगी। लोग कहते हैं कि आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन निर्दोष लोगों को उनके धर्म के कारण बेरहमी से मार दिया गया।

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झारखंड भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी समेत कई नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने एयरपोर्ट पर रंजन को श्रद्धांजलि दी। मरांडी ने कहा कि जिस तरह से धर्म के नाम पर निर्दोष लोगों की हत्या की गई, वह माफ करने लायक नहीं है। उन्होंने कहा, सरकार अपराधियों को न्याय के कठघरे में लाएगी। हमले के मास्टरमाइंड को भी बख्शा नहीं जाएगा।

Pahalgam Attack Manish Ranjan had asked his parents to visit Vaishno Devi his friend told story Ranchi airport
शव के पास मौजूद लोग - फोटो : अमर उजाला

'मुस्कुराते हुए कश्मीर गया था रंजन, लौटे ताबूत में, बेटे का शव देखते चीख पड़े पिता'
‘मैं कुछ नहीं बोलना चाहता...मुझे अकेला छोड़ दीजिए’ यह शब्द थे आईबी ऑफिसर मनीष रंजन के पिता मंगलेश कुमार मिश्रा के, जो अपने बेटे की मौत के सदमे में टूट चुके थे। गुरुवार को जब 33 वर्षीय मनीष रंजन का पार्थिव शरीर पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के झालदा स्थित उनके घर पहुंचा, तो वहां मातम छा गया। मनीष रंजन हैदराबाद में आईबी में सेक्शन ऑफिसर के पद पर तैनात थे। मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में मारे गए 26 लोगों में शामिल थे।

उनके पिता झालदा के हिंदी हाईस्कूल से हेडमास्टर पद से रिटायर हुए हैं। उन्होंने रुंधे गले से कहा कि रंजन मुस्कुराते हुए कश्मीर गया था। वो हर दिन फोन और व्हाट्सएप पर हमसे बात करता था, हमारी तबीयत पूछता था। उस दिन भी उसका फोन आया था। झालदा में रंजन और अन्य पीड़ितों की याद में सभी दुकानें बंद रहीं। रांची एयरपोर्ट पर झारखंड बीजेपी अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी समेत कई नेताओं और अफसरों ने रंजन को श्रद्धांजलि दी। मरांडी ने कहा कि मासूम लोगों की इस तरह से धार्मिक आधार पर हत्या माफ करने लायक नहीं है। इस हमले के गुनहगारों को सरकार सजा दिलाएगी।

पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने झालदा में रंजन के माता-पिता को ढांढस बंधाया और श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि ऐसे क्रूर हमलों का जवाब उसी भाषा में दिया जाएगा जिसे आतंकी समझते हैं। 40 वर्षीय बिटन अधिकारी की पत्नी सोहिनी ने बताया कि हमलावरों ने उनके पति से कलमा पढ़ने को कहा था। जब उन्होंने यह कहकर मना किया कि वह दूसरे धर्म से हैं, तो उन्हें गोली मार दी गई।

‘मेरा संसार उजड़ गया। मेरा तीन साल का बेटा बार-बार पूछता है – 'पापा कहां हैं? और 'फायर, फायर' कहता है, सोहिनी ने बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी और अग्निमित्रा पॉल के सामने दुख बयां करते हुए कहा। नेताओं ने उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।

टैक्सी ड्राइवर इकबाल ने की मदद
बिटन अमेरिका के फ्लोरिडा में एक आईटी कंपनी में काम करते थे और कोलकाता के बैस्नबघाटा और बेहाला में उनके घर हैं। वहीं, तीसरे पीड़ित समीर गुहा के रिश्तेदारों ने बताया कि हमले के बाद एक स्थानीय टैक्सी ड्राइवर इकबाल ने गुहा की पत्नी और बेटी की मदद की। गुहा की लाश बाइसारन घाटी में पड़ी थी और हमलावर भाग चुके थे।

समीर के जीजा सुभ्रत घोष ने बताया कि इकबाल ने अपनी मोबाइल फोन से मेरी बहन को कॉल करने दिया। उसने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, पोस्टमॉर्टम के बाद शव मिलने तक साथ रहा, और यहां तक कि एयरपोर्ट पहुंचाने के लिए वाहन की भी व्यवस्था की। उसने कोई किराया तक नहीं लिया। बिटन अधिकारी और समीर गुहा के शव बुधवार रात कोलकाता पहुंचे।

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