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भाषा विवाद: गैर-आदिवासी संगठनों ने आज झारखंड बंद का आह्वान किया, लोगों से समर्थन की अपील

Sun, 06 Mar 2022 01:12 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, रांची
पीटीआई, रांची Published by: देव कश्यप Updated Sun, 06 Mar 2022 01:12 AM IST
सार

धनबाद और बोकारो जिलों की क्षेत्रीय भाषाओं की सूची से भोजपुरी और मगही को बाहर करने के बाद इसे फिर से शामिल कराने के लिए भोजपुरी मगही मैथिली अंगिका मंच (बीएमएमएएम) के नेतृत्व में गैर-आदिवासी संगठनों ने आज राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है। वे राज्य की अधिवास नीति (डोमिसाइल पॉलिसी) के लिए भूमि अभिलेखों के प्रमाण के रूप में 1932 की कट-ऑफ तिथि की मांग का भी विरोध कर रहे हैं। 

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Language row: Non-tribal outfits call for Jharkhand bandh Today
झारखंड बंद का आह्वान। (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

झारखंड के धनबाद और बोकारो जिलों की क्षेत्रीय भाषाओं की सूची से भोजपुरी और मगही को निकालने के बाद इसे फिर से शामिल करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इसी कड़ी में भोजपुरी मगही मैथिली अंगिका मंच (बीएमएमएएम) के नेतृत्व में गैर-आदिवासी संगठनों ने दोनों जिलों की क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में भोजपुरी और मगही को शामिल करने की मांग को लेकर रविवार को झारखंड में राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है।

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वे राज्य की अधिवास नीति (डोमिसाइल पॉलिसी) के लिए भूमि अभिलेखों के प्रमाण के रूप में 1932 की कट-ऑफ तिथि की मांग का भी विरोध कर रहे हैं। बीएमएमएएम ने अन्य गैर-आदिवासी संगठनों के साथ बंद को सफल बनाने के लिए लोगों से समर्थन की मांग करते हुए शनिवार शाम को रांची के शहीद चौक से अल्बर्ट एक्का चौक तक मशाल जुलूस निकाला।

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झारखंड सरकार ने 18 फरवरी को विरोध के बीच भोजपुरी और मगही को धनबाद और बोकारो जिले की क्षेत्रीय भाषाओं की सूची से हटा दिया था। वहीं विधायकों के एक वर्ग ने 1932- खतियान (व्यक्ति के भूमि दस्तावेज का प्रमाण) आधारित अधिवास नीति को लागू करने की मांग उठाई है। इस मुद्दे पर विधानसभा में जवाब देते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि 1932-खतियान आधारित अधिवास नीति को लागू करने पर विचार किया जा रहा है और जल्द ही इस संबंध में समिति गठित करने या नियम बनाने का निर्णय लिया जाएगा।

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बीएमएमएएम के अध्यक्ष कैलाश यादव ने कहा, ''हम झारखंड सरकार के भाषाओं को लेकर भेदभावपूर्ण रवैये का विरोध करते हैं और भोजपुरी और मगही को धनबाद और बोकारो की क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में शामिल करने की मांग करते हैं। 1932 की खतियान नीति की मांग भी निराधार है।'' उन्होंने दावा किया कि 28 संगठनों ने बंद के आह्वान का समर्थन किया है।

इस बीच, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, आदिवासी जन परिषद, केंद्रीय सरना समिति और आदिवासी लोहरा समाज सहित कई आदिवासी संगठनों ने शनिवार को एक बैठक में बीएमएमएएम के झारखंड बंद की आलोचना की। आदिवासी संगठनों ने 1932 की खतियान आधारित अधिवास नीति की अपनी मांग के समर्थन में 14 मार्च को राज्य विधानसभा का घेराव करने का फैसला किया है।


झारखंड सरकार ने व्यापक विरोध के बीच धनबाद और बोकारो की क्षेत्रीय भाषाओं की सूची से भोजपुरी और मगही को वापस ले लिया है। इसके बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग ने 24 दिसंबर, 2021 को जारी अधिसूचना वापस ले ली, जिसमें झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित जिला-स्तरीय पदों की भर्ती परीक्षाओं में उपस्थित होने के लिए मैट्रिक और इंटरमीडिएट स्तर में इन दो भाषाओं को अनुमति दी गई थी।

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