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झारखंड: बीमार महिला को बांस के सहारे कंधे पर टांगकर पहुंचाया अस्पताल, 12 किमी पैदल चले परिजन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, साहिबगंज Published by: प्रियंका तिवारी Updated Fri, 09 Apr 2021 12:29 PM IST

सार

  • झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं का आज भी है अभाव 
  • बीमार महिला को बांस के सहारे कंधे पर टांगकर पहुंचाया अस्पताल
  • 12 किलोमीटर पैदल चले परिजना
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झारखंड में मरीज को बांस के सहारे टांगकर अस्पताल ले जाते परिजन
झारखंड में मरीज को बांस के सहारे टांगकर अस्पताल ले जाते परिजन - फोटो : सोशल मीडिया

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विस्तार

झारखंड में स्वास्थ्य सेवा के अभाव के चलते एक पति ने अपनी बीमार पत्नी को बांस के सहारे कंधे पर टांगकर अस्पताल पहुंचाया। इस काम में उसके परिजनों ने भी उसकी मदद की। उन्होंने 12 किलोमीटर पैदल चलकर मरीज को अस्पताल पहुंचाया। दरअसल, बीमार महिली की तबीयत खराब हो जाने के बाद उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों को कोई भी सुविधा नहीं मिल, ऐसे में वे मरीज को बांस के सहारे अस्पताल पहुंचाने पर मजबूर हो गए। इस मामले से स्पष्ट होता है कि राज्य में स्वास्थ्य सेवा को लेकर किए गए तमाम दावों की सच्चाई क्या है।
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मामला साहिबगंज के सदर अस्पताल का है, जहां एक महिला मरीज को उसके परिजन बांस के सहारे कंधे पर टांगकर तालझारी थाना क्षेत्र के बांसकोला से करीब 12 किमी की दूरी पैदल तय कर सदर अस्पताल पहुंचे। यह देख लोग हैरत में पड़ गए कि इतनी भीषण गर्मी में बांस के सहारे कैसे मरीज को लेकर कोई अस्पताल पहुंचा है। 


बता दें कि महिला मरीज रूखीराम सोरेन तालझारी थाना क्षेत्र के बांसकोला के रहने वाले तालामय हेम्ब्रम की पत्नी हैं। 50 वर्षीय तालामय ने बताया कि उनकी पत्नी की तबीयत उल्टी व दस्त होने से कारण खराब होती जा रही थी। ऐसे में उन्हें जब कोई साधन नहीं मिला तो मजबूर होकर बांस के सहारे कंधे पर लादकर पैदल ही अस्पताल लाना पड़ा। उन्होंने बताया कि उन्होंने आसपास के लोगों से सहायता की मांग की थी, लेकिन किसी ने एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई।

मामले में साहिबगंज के सिविल सर्जन डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि तालामय को आपातकालीन स्थिति में 108 नंबर पर फोन कर एंबुलेंस को बुलाना चाहिए था। हालांकि, यह जांच का विषय है। गौरतलब है कि आपातकालीन स्थिति में तुरंत एंबुलेंस मिलना व निशुल्क मुहैया कराने के उद्देश्य से सरकार ने 108 एंबुलेंस सेवा शुरू की है, लेकिन राज्य में आज भी स्वास्थ्य सेवा हाशिए पर है। यहां से आज भी कई ऐसे इलाके हैं, जहां स्वास्थ्य सेवा तो दूर अस्पताल आने के लिए एंबुलेंस भी मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पाती।

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