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Jharkhand: कुरमी जाति को आदिवासी सूची में शामिल करने के विरोध में संयुक्त आदिवासी संगठन का जोरदार प्रदर्शन

Sat, 20 Sep 2025 03:22 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Sat, 20 Sep 2025 03:22 PM IST
सार

रांची में राजभवन के सामने संयुक्त आदिवासी संगठन ने कुरमी जाति को आदिवासी सूची में शामिल करने का कड़ा विरोध किया। आदिवासी नेताओं ने चेतावनी दी कि इससे उनके अधिकार, आरक्षण और पहचान पर असर पड़ेगा।

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jharkhand tribal organization protests inclusion of kurmi caste in st list
कुरमी जाति को आदिवासी सूची में शामिल करने को लेकर हुआ विरोध प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड में कुरमी जाति को आदिवासी सूची में शामिल करने की मांग को लेकर विवाद और तीव्र हो गया है। जहां एक ओर कुरमी समाज रेलवे ट्रैक पर बैठकर रेल रोको आंदोलन चला रहा है, वहीं दूसरी ओर संयुक्त आदिवासी संगठन ने इस मांग का कड़ा विरोध किया। शनिवार को राजधानी रांची स्थित राजभवन के सामने हजारों आदिवासी समाज के लोग एकत्रित हुए और धरना प्रदर्शन किया।

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धरना पर बैठे आदिवासी नेताओं ने कहा कि यदि कुरमी जाति को आदिवासी सूची में शामिल किया गया, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान आदिवासी समाज को होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे आदिवासियों के अधिकार, आरक्षण और उनकी पहचान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। नेताओं ने आरोप लगाया कि कुरमी समाज मूल रूप से आदिवासी नहीं बल्कि क्षत्रिय समुदाय से आते हैं और राजनीतिक लाभ के लिए अब आदिवासी बनने की मांग कर रहे हैं।
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धरना में शामिल रामदयाल मुंडा, सूरज टोप्पो, कुर्दिश मुंडा, वीरेंद्र महली, अजय कच्छप, पिंटू मुंडा और अजय पाहन ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से कुरमी समाज आदिवासियों से अलग रहा है और आदिवासियों के साथ कभी नहीं रहा। वहीं चरखी निशा, अनीता लिंडा और मनकी मुंडा ने भी कहा कि कुरमी समाज का आदिवासी इतिहास से कोई संबंध नहीं है।
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पार्वती कुमारी ने कहा, “हम अपने समाज, संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए यहां जुटे हैं। यदि कुरमी जाति को आदिवासी सूची में शामिल किया गया तो आने वाली पीढ़ियों को भारी नुकसान होगा।” बंदे उरांव ने कहा कि हमारा अस्तित्व और पहचान हमारी आदिवासीयत में है और किसी कीमत पर इसे खतरे में नहीं डाला जाएगा।

संयुक्त आदिवासी संगठन ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि कुरमी जाति को आदिवासी सूची में शामिल करने की कोशिश की गई, तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे अपने पूर्वजों की परंपरा और समाज की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। वहीं, दूसरी ओर कुरमी समाज भी अपने आंदोलन को तेज कर रहा है। रेलवे ट्रैक पर बैठकर रेल सेवाओं को बाधित कर वे सरकार से आदिवासी सूची में शामिल किए जाने की मांग कर रहे हैं। इस कारण पूरे राज्य में रेल परिचालन प्रभावित हुआ है। 

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