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झारखंड में पत्थलगड़ी समर्थकों ने की सात ग्रामीणों की हत्या, सीएम ने दिए एसआईटी जांच के आदेश

Wed, 22 Jan 2020 08:05 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: Priyesh Mishra Updated Wed, 22 Jan 2020 08:05 PM IST
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Jharkhand Seven people kidnapped, feared murdered over protesting Pathalgadi Movement
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में घोर नक्सल प्रभावित गुदड़ी प्रखंड के बुरुगुलीकेरा गांव में पत्थलगड़ी समर्थकों ने पत्थलगड़ी का विरोध करने वाले एक पंचायत प्रतिनिधि समेत सात ग्रामीणों की लाठी, डंडों और टांगी से हमला कर नृशंस हत्या कर दी जबकि कम से कम दो ग्रामीण लापता बताये जा रहे हैं।

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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि हम इस मुद्दे पर एक बैठक कर रहे हैं। सरकार किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं देती है। बहुत सारी अफवाहें फैलाई जा रही हैं लेकिन सरकार सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई करेगी।
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बैठत के बाद सीएम ने एसआईटी जांच का आदेश दिया है। यह आदेश उन्होंने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक के बाद दिया है।
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झारखंड पुलिस के पुलिस महानिरीक्षक, अभियान एवं राज्य पुलिस के प्रवक्ता ने साकेत कुमार सिंह ने बुधवार को बताया कि लापता बताए जा रहे नौ ग्रामीणों में से सात के शव बरामद कर लिए गये हैं। अन्य दो का पता नहीं चल सका है।

सिंह ने बताया कि पुलिस को मंगलवार को वारदात की सूचना मिली। इसके आधार पर पुलिस दल मंगलवार देर रात मौके पर पहुंचा। बुधवार को गांव से चार किलोमीटर दूर जंगल से पंचायत प्रतिनिधि समेत सात ग्रामीणों के जीर्णशीर्ण शव बरामद किये गये।

एक सवाल के जवाब में पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि ग्रामीणों की हत्या लाठी, डंडे और टांगी-फरसे से नृशंस तरीके से की गयी है। कई लोगों के शव तो पहचाने जाने लायक ही नहीं हैं।
 

स्थानीय लोगों ने बताया पत्थलगड़ी समर्थकों ने गांव में स्थानीय ग्रामीणों के साथ रविवार को बैठक आयोजित की थी जिसमें पत्थलगड़ी समर्थकों ने पत्थलगड़ी का विरोध करने पर गांव के एक उपमुखिया सह पंचायत प्रतिनिधि जेम्स बूढ़ और पांच-छह ग्रामीणों की लाठी डंडों से जमकर पिटाई की। भयभीत होकर जब अन्य ग्रामीण वहां से भाग गये तो कथित तौर पर पत्थलगड़ी समर्थक नौ लोगों को उठाकर जंगल ले गये।

उन्होंने बताया कि जब रविवार को लापता ग्रामीण अपने गांव नहीं लौटे तो उनके परिजनों ने सोमवार को गुदड़ी थाने में घटना की शिकायत की। गांव वालों ने बताया कि इस बीच पुलिस को जंगल से कुछ राहगीरों द्वारा मंगलवार की शाम सात लोगों की हत्या की सूचना मिली।

पूर्व रघुवर सरकार ने राज्य में पत्थलगड़ी समर्थकों के खिलाफ 2018 में सख्त कार्रवाई की थी और इसके नेताओं की बड़े पैमाने पर धर पकड़ कर उनके खिलाफ सरकारी कामकाज में बाधा डालने और संविधान की अवहेलना करने के आरोप में देशद्रोह के भी मुकदमे दर्ज करवाये थे।

क्या है पत्थलगड़ी और इसकी परंपरा

आदिवासी समुदाय और गांवों में विधि-विधान/संस्कार के साथ पत्थलगड़ी (बड़ा शिलालेख गाड़ने) की परंपरा पुरानी है। इनमें मौजा, सीमाना, ग्रामसभा और अधिकार की जानकारी रहती है। वंशावली, पुरखे तथा मरनी (मृत व्यक्ति) की याद संजोए रखने के लिए भी पत्थलगड़ी की जाती है। कई जगहों पर अंग्रेजों या फिर दुश्मनों के खिलाफ लड़कर शहीद होने वाले वीर सपूतों के सम्मान में भी पत्थलगड़ी की जाती रही है।

दरअसल, पत्थलगड़ी उन पत्थर स्मारकों को कहा जाता है जिसकी शुरुआत इंसानी समाज ने हजारों साल पहले की थी। यह एक पाषाणकालीन परंपरा है जो आदिवासियों में आज भी प्रचलित है। माना जाता है कि मृतकों की याद संजोने, खगोल विज्ञान को समझने, कबीलों के अधिकार क्षेत्रों के सीमांकन को दर्शाने, बसाहटों की सूचना देने, सामूहिक मान्यताओं को सार्वजनिक करने आदि उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रागैतिहासिक मानव समाज ने पत्थर स्मारकों की रचना की।

पत्थलगड़ी की इस आदिवासी परंपरा को पुरातात्त्विक वैज्ञानिक शब्दावली में ‘महापाषाण’, ‘शिलावर्त’ और मेगालिथ कहा जाता है। दुनिया भर के विभिन्न आदिवासी समाजों में पत्थलगड़ी की यह परंपरा मौजूदा समय में भी बरकरार है। झारखंड के मुंडा आदिवासी समुदाय इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं, जिनमें कई अवसरों पर पत्थलगड़ी करने की प्रागैतिहासिक और पाषाणकालीन परंपरा आज भी प्रचलित है। पत्थलगड़ी कई तरह का होता है। जानकारों का मानना है कि पत्थलगड़ी के कम से कम 40 प्रकार हैं, लेकिन वर्तमान में सात प्रकार के पत्थलगड़ी ही प्रचलित हैं।

पश्चिम सिंहभूम के बुरुगुलीकेला गांव की घटना से आहत हूं: सोरेन

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने पश्चिम सिंहभूम के बुरुगुलीकेरा गांव में सात ग्रामीणों की पत्थलगड़ी समर्थकों द्वारा की गयी नृशंस हत्या की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए गहरी चिन्ता और दुःख प्रकट किया है।

सरकारी प्रवक्ता ने रांची में बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नयी दिल्ली से जारी बयान में कहा कि इस घटना से मैं आहत हूँ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून सबसे ऊपर है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। राज्य की पुलिस जांच कर रही है। दोषियों पर जल्द से जल्द कार्रवाई और ऐसी घटना दोबारा न हो इसके लिए वे आज सभी संबंधित अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा करेंगे।

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