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झारखंड: HEC को फिर मिलेगी रफ्तार? संसदीय समिति ने सीएम सोरेन से की मुलाकात, पुनरुद्धार की संभावनाओं पर मंथन
Fri, 21 Aug 2026 06:45 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Fri, 21 Aug 2026 06:45 PM IST
सार
संसदीय समिति ने शुक्रवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर एचईसी के पुनरुद्धार की संभावनाओं और मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। छह सदस्यीय समिति ने रांची स्थित एचईसी का दौरा कर कंपनी को दोबारा पटरी पर लाने की संभावनाओं का भी जायजा लिया।
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सीएम हेमंत सोरेन। फाइल फोटो
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
उद्योग संबंधी संसदीय समिति ने शुक्रवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की और हैवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (एचईसी) लि. के संभावित पुनरुद्धार की योजनाओं एवं मौजूदा स्थिति पर चर्चा की।
छह सदस्यीय संसदीय स्थायी समिति की अध्यक्षता राज्यसभा सांसद तिरुचि शिवा कर रहे हैं।
शिवा, एचईसी के पुनरुद्धार के लिए बनी उप-समिति के संयोजक कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी और सदस्यों सुलता देव, मल्लु रवि, हसमुखभाई सोमभाई पटेल और चंदन चौहान के साथ गुरुवार को झारखंड पहुंचे थे।
संसदीय दल ने गुरुवार को रांची स्थित एचईसी लि का दौरा किया और इसकी वर्तमान स्थिति का आकलन करते हुए राज्य के स्वामित्व वाली इस कंपनी को पुनर्जीवित करने की संभावनाओं का अध्ययन किया। संसद सदस्यों ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से शिष्टाचार भेंट भी की।
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'1958 में बनी थी एचईसी'
रेड्डी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा, एचईसी की स्थापना 1958 में हुई थी। इसमें 20 हजार कर्मचारी, 7,000 एकड़ भूमि और देश की कुछ सबसे बड़ी मशीनरी थी। पिछले 68 वर्षों के संचालन में, तीन साल को छोड़कर, यह लगातार घाटे में चल रही थी। उन्होंने बताया कि छह सदस्यीय उप-समिति के रूप में हम इस बात का मूल्यांकन करने आए हैं कि कंपनी को कैसे पुनर्जीवित और इसे लाभप्रद बना सकते हैं।
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छह सदस्यीय संसदीय स्थायी समिति की अध्यक्षता राज्यसभा सांसद तिरुचि शिवा कर रहे हैं।
शिवा, एचईसी के पुनरुद्धार के लिए बनी उप-समिति के संयोजक कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी और सदस्यों सुलता देव, मल्लु रवि, हसमुखभाई सोमभाई पटेल और चंदन चौहान के साथ गुरुवार को झारखंड पहुंचे थे।
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संसदीय दल ने गुरुवार को रांची स्थित एचईसी लि का दौरा किया और इसकी वर्तमान स्थिति का आकलन करते हुए राज्य के स्वामित्व वाली इस कंपनी को पुनर्जीवित करने की संभावनाओं का अध्ययन किया। संसद सदस्यों ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से शिष्टाचार भेंट भी की।
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'1958 में बनी थी एचईसी'
रेड्डी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा, एचईसी की स्थापना 1958 में हुई थी। इसमें 20 हजार कर्मचारी, 7,000 एकड़ भूमि और देश की कुछ सबसे बड़ी मशीनरी थी। पिछले 68 वर्षों के संचालन में, तीन साल को छोड़कर, यह लगातार घाटे में चल रही थी। उन्होंने बताया कि छह सदस्यीय उप-समिति के रूप में हम इस बात का मूल्यांकन करने आए हैं कि कंपनी को कैसे पुनर्जीवित और इसे लाभप्रद बना सकते हैं।