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Jharkhand News: रामदास सोरेन के निधन के बाद मुख्यमंत्री ने थामी शिक्षामंत्री पद की कमान, आधिकारिक आदेश जारी

Mon, 18 Aug 2025 10:57 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: प्रिया वर्मा Updated Mon, 18 Aug 2025 10:57 PM IST
सार

राज्य के शिक्षामंत्री रामदास सोरेन के निधन के बाद अब शिक्षा मंत्री का कार्यभार खुद सीएम संभालेंगे। गौरतलब है कि पूर्व में हुए अशुभ संयोगों के चलते विधायक इस विभाग को तत्काल लेने से हिचक रहे थे।  

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Jharkhand News: Education Ministry Now Under CM After Ramdas Soren’s Demise, Official Order Issued
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड में शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन संभालेंगे। मंत्रिमंडल एवं निगरानी विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। हाल ही में शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन के बाद यह पद रिक्त हो गया था। ऐसे में नए मंत्री की नियुक्ति होने तक मुख्यमंत्री स्वयं इस विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगे। गौरतलब है कि झारखंड की राजनीति में शिक्षा मंत्रालय को लेकर एक अजीब संयोग देखने को मिलता रहा है। मौजूदा सरकार में अब तक जिन नेताओं ने यह जिम्मेदारी संभाली, उन्हें गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ा और उनका निधन हो गया।

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जगन्नाथ महतो हेमंत सोरेन सरकार (पार्ट-1) में शिक्षा मंत्री बने। कार्यकाल के दौरान उन्हें फेफड़े का संक्रमण हुआ और इलाज के लिए बेंगलुरु में फेफड़ा प्रत्यारोपण कराया गया लेकिन स्वास्थ्य लाभ न मिलने के कारण उनका निधन हो गया।
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दूसरी बार घाटशिला से विधायक रहे रामदास सोरेन हेमंत सोरेन सरकार (पार्ट-2) में शिक्षा मंत्री बनाया गया। कुछ समय बाद वे बाथरूम में गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज के दौरान हाल ही में उनका निधन हो गया। इन घटनाओं के चलते यह मंत्रालय अक्सर मनहूस विभाग कहकर चर्चा में रहा है। राजनीतिक हलकों में यह तक कहा जाने लगा है कि शिक्षा मंत्री का पद संभालना आसान नहीं है। हालांकि हेमंत सोरेन सरकार (पार्ट-1) के अंतिम वर्ष में लातेहार से विधायक बैद्यनाथ राम ने लगभग चार महीने तक शिक्षा मंत्रालय संभाला लेकिन 2019 विधानसभा चुनाव में वे भाजपा प्रत्याशी से हार गए और मंत्री पद से बाहर हो गए।


बहरहाल रामदास सोरेन के निधन के बाद खाली हुए पद को मुख्यमंत्री ने स्वयं संभालने का निर्णय लिया है। माना जा रहा है कि मंत्रालय का अशुभ संयोग देखते हुए विधायक इसे तत्काल लेने से हिचक रहे थे इसलिए फिलहाल इसे मुख्यमंत्री ने अपने पास रखा है।

राज्य के शिक्षा तंत्र की स्थिति पहले से ही कई सवालों के घेरे में है। स्कूलों की बदहाल स्थिति, शिक्षकों की कमी, कस्तूरबा विद्यालयों में आए दिन भोजन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, परीक्षाओं की गड़बड़ी इन तमाम चुनौतियों से निपटने के लिए अब मुख्यमंत्री को खुद सीधे दखल देना होगा। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सीएम का ध्यान इस मंत्रालय पर कितना केंद्रित हो पाता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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