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झारखंड: गैराज में काम कर रहा नेशनल हैंडबॉल चैंपियन विकास, राज्य को दिला चुके गोल्ड मेडल

Fri, 02 Jul 2021 09:36 PM IST
कुमार संभव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: कुमार संभव Updated Fri, 02 Jul 2021 09:36 PM IST
सार

विकास की उम्र महज 20 साल है। वह राष्ट्रीय स्तर पर खेलकूद में गोल्ड मेडल लाकर राज्य का नाम ऊंचा कर चुके हैं, लेकिन अब गैराज में बतौर हेल्पर काम करने को मजबूर हैं। दरअसल, चार साल पहले विकास के पिता की मौत हो गई।

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Jharkhand National handball champion Vikas Kumar Pandey working in the garage wongiven many gold medals to the state
गैराज में काम करने को मजबूर हैंडबॉल चैंपियन विकास। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हमारे देश में प्रतिभा कदम-कदम पर नजर आती है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में वह प्रतिभा अक्सर किसी कोने में दम तोड़ देती है। कुछ ऐसा ही हाल राष्ट्रीय हैंडबॉल चैंपियन विकास कुमार पांडेय का है, जो चार बार झारखंड की टीम का हिस्सा बन चुके हैं। विकास की आर्थिक स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि अब उन्हें अपने घर का खर्च चलाने के लिए गैराज में गाड़ियों की मरम्मत करनी पड़ रही है। 

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चार साल पहले उठा पिता का साया

जानकारी के मुताबिक, विकास की उम्र महज 20 साल है। वह राष्ट्रीय स्तर पर खेलकूद में गोल्ड मेडल लाकर राज्य का नाम ऊंचा कर चुके हैं, लेकिन अब गैराज में बतौर हेल्पर काम करने को मजबूर हैं। दरअसल, चार साल पहले विकास के पिता की मौत हो गई। इसके बाद मां की मानसिक स्थिति बिगड़ती चली गई। घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ी तो खाने के लाले पड़ने लगे। ऐसे में विकास की बहन ने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया, लेकिन लॉकडाउन की वजह से क्लासेज बंद हैं। इसके बाद विकास को मजबूरन चार हजार रुपये महीने वेतन पर गैराज में काम करना पड़ गया। 

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न पढ़ पा रहे और तैयारी कर पा रहे विकास

बता दें कि आर्थिक तंगी ने विकास का पूरा तालमेल बिगाड़ दिया। ऐसे में वह न तो सही तरीके से पढ़ाई कर पा रहे हैं और न ही खेलकूद प्रतियोगिताओं में कामयाबी हासिल कर पा रहे हैं। अहम बात यह है कि विकास ने मदद के लिए कई जगह गुहार लगाई, लेकिन उनके हाथ कुछ नहीं लगा। 

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गैराज मालिक ने कही यह बात

गैराज मालिक अजमद का कहना है कि विकास जैसे खिलाड़ियों को उनकी सही जगह मिलनी चाहिए। वह गैराज में काम करने के लिए नहीं बने हैं। अजमद बताते हैं कि विकास की प्रतिभा को देखते हुए उन्हें काम कराने में भी हिचकिचाहट होती है। 

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