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झारखंड: शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों पर केंद्र सख्त, जेसीईआरटी और डाइट के खाली पद इसी साल भरने के निर्देश
Fri, 09 Oct 2026 06:36 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Fri, 09 Oct 2026 06:36 PM IST
सार
झारखंड के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) और जेसीईआरटी में शिक्षकों के खाली पदों पर केंद्र सरकार ने सख्ती दिखाई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राज्य सरकार को चालू वर्ष के भीतर रिक्त पदों की समीक्षा कर उन्हें भरने के निर्देश दिए हैं।
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झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
केंद्र सरकार ने झारखंड के जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) तथा झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) में बड़े पैमाने पर खाली पड़े शिक्षकों के पदों पर सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राज्य के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग को चालू वर्ष के भीतर हर हाल में इन सभी रिक्तियों की समीक्षा कर उन्हें भरने के निर्देश जारी किए हैं। केंद्र का मानना है कि इन शैक्षणिक संस्थानों को सुदृढ़ बनाकर ही राज्य में शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था को बेहतर किया जा सकता है।
बड़े पैमाने पर खाली पड़े हैं शैक्षणिक पद
हाल ही में आयोजित केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में जेसीईआरटी और डायट में संकाय सदस्यों की कमी का ब्योरा सामने आया है। राज्य स्तरीय संस्थान जेसीईआरटी में कुल 11 स्वीकृत पदों के विरुद्ध केवल चार पदों पर ही संकाय सदस्य कार्यरत हैं, जबकि 65 प्रतिशत पद रिक्त पड़े हैं। इसी तरह राज्यभर के जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों में स्वीकृत 312 पदों के विरुद्ध 157 पद खाली हैं। इस प्रकार डायट में करीब 50 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। मंत्रालय ने समीक्षा के दौरान रेखांकित किया कि पिछले तीन वर्षों से इन संस्थानों में खाली पदों की संख्या अत्यधिक बनी हुई है।
प्रतिनियुक्ति समाप्त कर नियमित भर्ती पर जोर
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों को मजबूत बनाने के लिए प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था समाप्त की जानी चाहिए। इसके स्थान पर नियमित शिक्षकों की भर्ती को प्राथमिकता देना अनिवार्य है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार विद्यालयों के अध्यापकों को डायट में प्रतिनियुक्त करने से स्कूली बच्चों की शिक्षा पर बुरा असर पड़ता है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षक तैयार करने के लिए इन संस्थानों की भूमिका बेहद अहम है। इसलिए पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से नियमित फैकल्टी की नियुक्ति की आवश्यकता पर बल दिया गया है ताकि विद्यालयों में बेहतर शिक्षक मिल सकें।
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सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने की योजना प्रभावित
राज्य के सभी जिलों में संचालित डायट को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाना है। केंद्र सरकार इस योजना के लिए आर्थिक अनुदान भी उपलब्ध कराती है, लेकिन शिक्षकों के रिक्त पदों के कारण इस योजना के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। प्राथमिक स्तर पर कक्षा एक से पांच के बच्चों को पढ़ाने वाले अध्यापकों के लिए अनिवार्य डीएलएड पाठ्यक्रम के सफल संचालन में डायट की केंद्रीय भूमिका होती है। इस बीच, राज्य सरकार डायट में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए नई नियमावली गठित कर रही है, जिसे मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलते ही बहाली प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
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बड़े पैमाने पर खाली पड़े हैं शैक्षणिक पद
हाल ही में आयोजित केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में जेसीईआरटी और डायट में संकाय सदस्यों की कमी का ब्योरा सामने आया है। राज्य स्तरीय संस्थान जेसीईआरटी में कुल 11 स्वीकृत पदों के विरुद्ध केवल चार पदों पर ही संकाय सदस्य कार्यरत हैं, जबकि 65 प्रतिशत पद रिक्त पड़े हैं। इसी तरह राज्यभर के जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों में स्वीकृत 312 पदों के विरुद्ध 157 पद खाली हैं। इस प्रकार डायट में करीब 50 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। मंत्रालय ने समीक्षा के दौरान रेखांकित किया कि पिछले तीन वर्षों से इन संस्थानों में खाली पदों की संख्या अत्यधिक बनी हुई है।
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प्रतिनियुक्ति समाप्त कर नियमित भर्ती पर जोर
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों को मजबूत बनाने के लिए प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था समाप्त की जानी चाहिए। इसके स्थान पर नियमित शिक्षकों की भर्ती को प्राथमिकता देना अनिवार्य है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार विद्यालयों के अध्यापकों को डायट में प्रतिनियुक्त करने से स्कूली बच्चों की शिक्षा पर बुरा असर पड़ता है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षक तैयार करने के लिए इन संस्थानों की भूमिका बेहद अहम है। इसलिए पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से नियमित फैकल्टी की नियुक्ति की आवश्यकता पर बल दिया गया है ताकि विद्यालयों में बेहतर शिक्षक मिल सकें।
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सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने की योजना प्रभावित
राज्य के सभी जिलों में संचालित डायट को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाना है। केंद्र सरकार इस योजना के लिए आर्थिक अनुदान भी उपलब्ध कराती है, लेकिन शिक्षकों के रिक्त पदों के कारण इस योजना के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। प्राथमिक स्तर पर कक्षा एक से पांच के बच्चों को पढ़ाने वाले अध्यापकों के लिए अनिवार्य डीएलएड पाठ्यक्रम के सफल संचालन में डायट की केंद्रीय भूमिका होती है। इस बीच, राज्य सरकार डायट में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए नई नियमावली गठित कर रही है, जिसे मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलते ही बहाली प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।