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मॉब लिंचिंग निवारण विधेयक 2021: राज्यपाल ने लौटाई फाइल, कहा-'भीड़' शब्द को सही से परिभाषित करे सरकार

Thu, 17 Mar 2022 10:51 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क अमर उजाला, रांची Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 17 Mar 2022 10:51 PM IST
सार

मॉब वायलेंस एंड मॉब लिंचिंग निवारण विधेयक 2021 को झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस ने वापस कर दिया है। इस विधेयक को राज्यपाल रमेश बैस ने करीब चार महीने तक अपने पास रखा और विधि विभाग से परामर्श कर इसे वापस कर दिया। 

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Jharkhand Governor Ramesh Bais objected to Mob Violence and Mob Lynching Prevention Bill 2021 has been returned to state government
हेमंत सोरेन और राज्यपाल रमेश बैस - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मॉब वायलेंस एंड मॉब लिंचिंग निवारण विधेयक 2021 को झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस ने वापस कर दिया है। राज्यपाल ने इस विधेयक में 'भीड़' शब्द को फिर से सही तरीके से परिभाषित करने का निर्देश देते हुए राज्य सरकार को वापस कर दिया। इतना ही नहीं राज्यपाल ने हिंदी और अंग्रेजी प्रारूपों में अंतर की ओर भी राज्य सरकार का ध्यान आकृष्ट किया है। इस विधेयक को राज्यपाल रमेश बैस ने करीब चार महीने तक अपने पास रखा और विधि विभाग से परामर्श कर इसे वापस कर दिया। 

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गौरतलब है कि पिछले वर्ष 21 दिसंबर को झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में राज्य की हेमंत सरकार ने इसे सदन से पारित करा कर इस कानून पर मुहर लगाने के लिए राज्यपाल के पास भेजा था। इसके करीब 87 दिन बीतने के बाद राज्यपाल ने इसमें 'भीड़' शब्द को फिर से परिभाषित करने की टिप्पणी करते हुए वापस कर दिया। वहीं,  राज्यपाल ने जिस ‘भीड़’ शब्द को लेकर टिप्पणी की है, उसको लेकर भाजपा पहले से भी मुखर रही है।
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दरअसल, राज्य सरकार ने मॉब लिंचिंग निवारण विधेयक 2021 के में जुर्माने के साथ संपत्ति की कुर्की और तीन साल से आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया है। इसमें यह भी था कि अगर मॉब लिंचिंग में किसी की मौत हो जाती है, तो दोषी को आजीवन कारावास की सजा होगी। इसके अलावा गंभीर चोट आने पर 10 साल से उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया गया है। विधेयक के अनुसार, भीड़ को उकसाने वालों को भी दोषी माना जाएगा और उन्हें तीन साल की सजा दी जाएगी। अपराध से जुड़े किसी साक्ष्य को नष्ट करने वाला भी अपराधी माना जाएगा। इसके अलावा इस विदेयक में पीड़ित परिवार को मुआवजा व पीड़ित के मुफ्त इलाज की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।

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