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झारखंड: फर्जी एपीके फाइल से ठगी करने वाले चार साइबर अपराधी गिरफ्तार
Fri, 18 Sep 2026 05:38 PM IST
राहुल कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, देवघर।
अमर उजाला ब्यूरो, देवघर।
Published by: राहुल कुमार
Updated Fri, 18 Sep 2026 05:38 PM IST
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cybercriminals
- फोटो : AI
झारखंड के देवघर जिले की साइबर थाना पुलिस और मधुपुर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए चार साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस टीम ने इन आरोपियों को मधुपुर थाना क्षेत्र से पकड़ा। गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से आधा दर्जन मोबाइल फोन और चार सिम कार्ड भी बरामद हुए हैं। पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर को मिली गुप्त सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई, जिसके बाद सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
गुप्त सूचना मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक ने पुलिस उपाधीक्षक कैलाश प्रसाद महतो के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया था। टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार साइबर अपराधियों को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों में मधुपुर थाना क्षेत्र के बरियाही गढ़ा निवासी अनिश दास, सारठ थाना क्षेत्र के खरना गांव निवासी सुमेश महरा, जसीडीह थाना क्षेत्र के रोहिणी अजान टोला निवासी राहुल दास और मधुपुर थाना क्षेत्र के गुनियासोल निवासी दिनेश दास शामिल हैं।
एपीके फाइल का खेल, ठगों ने कबूल किया जुर्म
गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को गहन पूछताछ के लिए साइबर थाने लाया गया। पूछताछ के दौरान चारों साइबर ठगों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और अपनी ठगी के तरीकों का खुलासा किया। आरोपियों ने बताया कि वे खुद को डिजिटल भुगतान सेवा जैसे गूगल पे, फोन-पे और पेटीएम के फर्जी कस्टमर केयर अधिकारी बनाकर लोगों को फोन करते थे। इसके बाद वे कैश बैक, पीएम किसान योजना, बिजली बिल के भुगतान और आरटीओ चालान के नाम पर आम लोगों को झांसे में लेते थे। लोगों को विश्वास में लेने के बाद वे उनके मोबाइल पर फर्जी एपीके फाइल भेजते थे। जैसे ही पीड़ित उस फाइल को डाउनलोड करता, ठग उसके मोबाइल फोन का पूरा नियंत्रण हासिल कर लेते थे और खाते से बैंक राशि उड़ा लेते थे।
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डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू
पुलिस ने साइबर अपराधियों के पास से बरामद छह मोबाइल फोन और चार सिम कार्डों की सूक्ष्म जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और सिम कार्डों की तकनीकी जांच से साइबर ठगी के कई अन्य मामलों का पर्दाफाश हो सकता है। साइबर थाना पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन अपराधियों ने अब तक कुल कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और ठगी की गई रकम को किन खातों में ट्रांसफर किया था।
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गुप्त सूचना मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक ने पुलिस उपाधीक्षक कैलाश प्रसाद महतो के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया था। टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार साइबर अपराधियों को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों में मधुपुर थाना क्षेत्र के बरियाही गढ़ा निवासी अनिश दास, सारठ थाना क्षेत्र के खरना गांव निवासी सुमेश महरा, जसीडीह थाना क्षेत्र के रोहिणी अजान टोला निवासी राहुल दास और मधुपुर थाना क्षेत्र के गुनियासोल निवासी दिनेश दास शामिल हैं।
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एपीके फाइल का खेल, ठगों ने कबूल किया जुर्म
गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को गहन पूछताछ के लिए साइबर थाने लाया गया। पूछताछ के दौरान चारों साइबर ठगों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और अपनी ठगी के तरीकों का खुलासा किया। आरोपियों ने बताया कि वे खुद को डिजिटल भुगतान सेवा जैसे गूगल पे, फोन-पे और पेटीएम के फर्जी कस्टमर केयर अधिकारी बनाकर लोगों को फोन करते थे। इसके बाद वे कैश बैक, पीएम किसान योजना, बिजली बिल के भुगतान और आरटीओ चालान के नाम पर आम लोगों को झांसे में लेते थे। लोगों को विश्वास में लेने के बाद वे उनके मोबाइल पर फर्जी एपीके फाइल भेजते थे। जैसे ही पीड़ित उस फाइल को डाउनलोड करता, ठग उसके मोबाइल फोन का पूरा नियंत्रण हासिल कर लेते थे और खाते से बैंक राशि उड़ा लेते थे।
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डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू
पुलिस ने साइबर अपराधियों के पास से बरामद छह मोबाइल फोन और चार सिम कार्डों की सूक्ष्म जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और सिम कार्डों की तकनीकी जांच से साइबर ठगी के कई अन्य मामलों का पर्दाफाश हो सकता है। साइबर थाना पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन अपराधियों ने अब तक कुल कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और ठगी की गई रकम को किन खातों में ट्रांसफर किया था।