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फीस नहीं भरी तो स्कूल ने शिक्षा मंत्री की नातिन को क्लास लेने से रोका, खुद जाकर जमा कराए पैसे
Sun, 20 Sep 2020 01:10 PM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: अनवर अंसारी
Updated Sun, 20 Sep 2020 01:10 PM IST
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शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो
- फोटो : Facebook
कोरोना संकट और लॉकडाउन के कारण लोगों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। इस कारण कई परिवार अपने बच्चों की स्कूल फीस भरने में असमर्थ हो गए हैं। इन हालातों को ध्यान में रखते हुए झारखंड के शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो ने निजी स्कूलों को हिदायत दी थी कि वे फीस को लेकर नरमी बरतें। हालांकि, इस बार शिक्षा मंत्री को खुद ही स्कूल द्वारा फीस की मनमानी से जूझना पड़ा।
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दरअसल, शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो की नातिन रिया की फीस जमा नहीं होने पर स्कूल ने उसे ऑनलाइन क्लास से हटा दिया। मामले की जानकारी मिलते ही शिक्षा मंत्री तुरंत स्कूल पहुंचे और काउंटर पर खड़े होकर फीस जमा की।
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जब उनसे इस घटनाक्रम को लेकर सवाल किया गया तो महतो ने कहा, वह मंत्री के रूप में नहीं बल्कि एक अभिभावक के तौर पर स्कूल पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि उनकी नातिन रिया ने उन्हें क्लास से हटाने के बारे में बताया, जिसके बाद उन्होंने खुद ही स्कूल पहुंचकर फीस जमा करवाई। मंत्री की नातिन बोकारो डीपीएस स्कूल में पढ़ती है।
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दूसरी तरफ जब इस मामले को लेकर बोकारो डीपीएस से जानकारी ली गई तो उसने अधिकारियों को बताया कि उसने रिया का नाम नहीं काटा था। स्कूल की प्रधानाध्यपक शैलजा जयकुमार ने बताया कि छात्रा का नाम सूची से नहीं हटाया गया था। वहीं, इस मामले में शिक्षा पदाधिकारी ने जांच के आदेश दिए हैं, ताकि स्कूल के दावे की पड़ताल की जा सके।
वहीं, इस घटना पर मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने तंज कसते हुए कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी का आलम सरकार को आईना दिखाने के लिए पर्याप्त है। प्रदेश भाजपा प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि चास के दिल्ली पब्लिक स्कूल की घटना तो बस एक उदाहरण मात्र है। चूंकि यह मामला सूबे के शिक्षा मंत्री के घर से संबंधित था, इसलिए मंत्री आनन-फानन में स्कूल पहुंच गए।
उन्होंने कहा कि हर दिन राज्य के सैकड़ों-हजारों अभिभावक निजी स्कूलों की मनमानी से परेशान हैं, लेकिन प्रदेश का शिक्षा मंत्रालय और राज्य सरकार इन स्कूलों के सामने असहाय हैं।