फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jharkhand ›   Jharkhand: Decision divided on hanging of two Maoists in the case of murder of six policemen

Jharkhand: छह पुलिसकर्मियों की हत्या मामले में दो माओवादियों की फांसी पर बंटा फैसला, जानें किसकी क्या राय?

Sun, 20 Jul 2025 07:24 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: शबाहत हुसैन Updated Sun, 20 Jul 2025 07:24 PM IST
सार

Jharkhand: न्यायमूर्ति रोंगन मुखोपाध्याय ने अपने फैसले में कहा कि चश्मदीद गवाहों की गवाही भरोसेमंद नहीं मानी जा सकती, क्योंकि उन्होंने खुद बताया कि वे हमला होते ही बेहोश हो गए थे। ऐसे में यह संभव नहीं कि उन्होंने हमलावरों के मुंह से किसी का नाम सुना हो।

विज्ञापन
Jharkhand: Decision divided on hanging of two Maoists in the case of murder of six policemen
झारखंड हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

झारखंड हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 2013 में पाकुड़ एसपी अमरजीत बलिहार समेत छह पुलिसकर्मियों की हत्या मामले में दो माओवादियों को दी गई फांसी की सजा पर विभाजित फैसला (स्प्लिट वर्डिक्ट) सुनाया है। इस मामले में न्यायमूर्ति रोंगन मुखोपाध्याय ने दोनों अभियुक्तों को बरी करने की राय दी, जबकि न्यायमूर्ति संजय प्रसाद ने फांसी की सजा को बरकरार रखा।

विज्ञापन

यह मामला 2 जुलाई 2013 को पाकुड़ में पुलिस टीम पर माओवादियों द्वारा किए गए हमले से जुड़ा है। हमले में एसपी अमरजीत बलिहार समेत छह पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी। जान गंवाने वाले पुलिसकर्मी थे। जिनमें राजीव कुमार शर्मा, मनोज हेंब्रम, चंदन कुमार थापा, अशोक कुमार श्रीवास्तव, संतोष कुमार मंडल और अमरजीत बलिहार। इस हमले में लेबेनियस मरांडी और धनराज मरैया नाम के दो पुलिसकर्मी जिंदा बच गए थे।

विज्ञापन

डुमका सेशन कोर्ट ने 26 सितंबर 2018 को प्रवीर मुर्मू उर्फ प्रवीर दा और संतन बास्के उर्फ ताला दा को फांसी की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दोनों अभियुक्तों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। इस अपील पर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 17 जुलाई को 197 पन्नों में फैसला सुनाया। 31 गवाहों की गवाही हुई, जिनमें दो मुख्य गवाह मरांडी और मरैया घटना के चश्मदीद थे। इन दोनों ने दावा किया कि उन्होंने हमलावरों के मुंह से ‘प्रवीर’ और ‘ताला’ का नाम सुना था।

विज्ञापन
विज्ञापन

न्यायमूर्ति रोंगन मुखोपाध्याय ने अपने फैसले में कहा कि चश्मदीद गवाहों की गवाही भरोसेमंद नहीं मानी जा सकती, क्योंकि उन्होंने खुद बताया कि वे हमला होते ही बेहोश हो गए थे। ऐसे में यह संभव नहीं कि उन्होंने हमलावरों के मुंह से किसी का नाम सुना हो। साथ ही दोनों ने यह भी नहीं कहा कि उन्होंने आरोपियों को खुद देखा था। इस आधार पर न्यायमूर्ति मुखोपाध्याय ने फांसी की सजा को रद्द करते हुए दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।


पढ़ें: भाजपा ने राज्य सरकार पर साधा निशाना, कहा– अधिकारी कर रहे पॉक्सो कोर्ट का काम

दूसरी ओर, न्यायमूर्ति संजय प्रसाद ने चश्मदीद गवाहों की गवाही को विश्वसनीय माना। उन्होंने कहा कि गवाहों ने कोर्ट में अभियुक्तों की पहचान की और यह स्पष्ट किया कि वे मौके पर मौजूद थे। न्यायमूर्ति प्रसाद ने कहा कि एक आईपीएस अधिकारी और उनकी टीम की ड्यूटी के दौरान की गई हत्या किसी भी तरह की सहानुभूति के योग्य नहीं है। इसलिए फांसी की सजा को बरकरार रखा जाना चाहिए।

साथ ही उन्होंने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मृतक एसपी अमरजीत बलिहार के परिजनों को दो करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए और उनके बेटे या बेटी को डीएसपी या डिप्टी कलेक्टर के पद पर नौकरी दी जाए। इसके अलावा शहीद हुए अन्य पांच पुलिसकर्मियों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा और compassionate grounds पर चतुर्थ श्रेणी की सरकारी नौकरी दी जाए।

अब चूंकि दोनों जजों की राय अलग-अलग है, इसलिए यह मामला झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजा जाएगा। मुख्य न्यायाधीश या तो खुद इस पर सुनवाई करेंगे या किसी तीसरे जज को नामित करेंगे जो अंतिम फैसला सुनाएंगे। यह मामला न केवल कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों को न्याय दिलाने की दिशा में भी एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed