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Jharkhand: 'सरना' कोड पर CM सोरेन ने राष्ट्रपति से मांगी मदद, आदिवासियों को अलग धार्मिक मान्यता देने का मामला

Thu, 25 May 2023 07:03 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: जलज मिश्रा Updated Thu, 25 May 2023 07:03 PM IST
सार

Jharkhand Sarna News: मुख्यमंत्री सोरेन का कहना है कि केंद्र अगर मांग को मंजूरी देता है तो आदिवासियों के अस्तित्व की रक्षा होगी। उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू से सरना कोड के अलावा संविधान के आठवीं अनुसूची में तीन आदिवासी भाषाओं को शामिल करने की मांग की है। इन तीन आदिवासी भाषाओं में मुंडारी, हो और कुदुख शामिल है।

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jharkhand cm hemant soren asks for help to president murmu for recognizing sarna code in india
सरना धर्म कोड की मांग। फाइल फोटो - फोटो : PTI

विस्तार

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को राष्ट्रपति मुर्मू से अनुरोध किया है। गुरुवार को सोरेन ने राष्ट्रपति से मांग की है कि वह सरना कोड को लागू करने के लिए राज्य को केंद्र की मंजूरी दिलाने में मदद करें। सरना आदिवासियों के अनुयायी अपने आप को प्रकृति के पूजक बताते हैं, जो दशकों से अलग धार्मिक मान्यता मिलने के लिए मांग कर रहे हैं। साथ ही उनकी मांग है कि अगली जनगणना में धार्मिक कॉलम में एक और विकल्प सरना शामिल किया जाए। बता दें, झारखंड विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया गया था। प्रस्ताव में सरना को जनगणना में एक अलग धर्म के रूप में शामिल करने की मांग थी।

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तीन भाषाओं को भी शामिल करने की मांग
मुख्यमंत्री सोरेन का कहना है कि केंद्र अगर मांग को मंजूरी देता है तो आदिवासियों के अस्तित्व की रक्षा होगी। उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू से सरना कोड के अलावा संविधान के आठवीं अनुसूची में तीन आदिवासी भाषाओं को शामिल करने की मांग की है। इन तीन आदिवासी भाषाओं में मुंडारी, हो और कुदुख शामिल है। बता दें, सरकार ने पहले ही इन तीनों भाषाओं को झारखंड में दूसरी भाषा का दर्जा दे चुकी है। 

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25 हजार महिलाएं हुईं शामिल
खूंटी जिले में आयोजित स्वयं सहायता समूहों के सम्मेलन में बोलते हुए सीएम ने कहा था कि राज्य सरकार आदिवासियों के सम्मान के लिए केंद्र सरकार के साथ चल रही है। हमें अपनी पहचान जमीन और भाषा को आगे बढ़ाना होगा। बिरसा मुंडा कॉलेज स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में लगभग 25 हजार महिलाएं शामिल हुईं थी।

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जानिए, क्या है सरना कोड
झारखंड के मूल आदिवासियों के एक समुदाय की मांग है की मांग है कि इन्हें एक अलग धर्म का दर्जा दिया जाए। सरना के अनुयायी अपने आप को प्रकृति का पूजक कहते है और एक अलग धर्म की पहचान के लिए काफी लंबे समय से मांग कर रहे हैं। आदिवासियों का कहना है कि चूंकि उन्हें अलग धर्म के रूप में मान्यता नहीं मिली है, इसलिए कोई उन्हें हिंदू, कोई मुस्लिम तो कई ईसाई धर्म में शामिल कर लेता है। मांग पर एक बार केंद्रीय मंत्री फगन सिंह कुलस्ते ने कहा था कि आदिवासी पहले सनातनी हिंदू है। इनकी पूजा पद्धति हिंदुओं की पूजा शैली से मेल खाती है। दोनों में कोई अंतर नहीं है। धर्म और समाज को बांटने की मंशा रखने वाले लोग ही अलग धर्म की मांग कर रहे हैं।

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