फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jharkhand ›   Jharkhand Bandh Patratu Protest Main Road Blocked by Farmers and Displaced Locals Over Rights

झारखंड बंद: पतरातू में किसानों-विस्थापितों का प्रदर्शन, मुख्य सड़क जाम कर उठाई अधिकार और सम्मान की मांग

Wed, 30 Sep 2026 12:21 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: हिमांशु सिंह बघेल Updated Wed, 30 Sep 2026 12:21 PM IST
सार

झारखंड बंद के दौरान पतरातू के न्यू मार्केट में किसानों, विस्थापितों और मजदूरों से जुड़े संगठनों ने प्रदर्शन किया और मुख्य सड़क जाम कर अपनी मांगें उठाईं। प्रदर्शनकारियों ने आंदोलनकारियों के लिए सम्मान पेंशन व आश्रितों को रोजगार, लैंड बैंक रद्द करने, किसानों को भूमि का मालिकाना हक, विस्थापितों को मुआवजा-पुनर्वास और किसानों को 10 हजार रुपये मासिक पेंशन देने समेत कई मांगें रखीं।

विज्ञापन
Jharkhand Bandh Patratu Protest Main Road Blocked by Farmers and Displaced Locals Over Rights
किसानों-महीने मुख्य सड़क जाम कर विरोध जताया - फोटो : Social Media

विस्तार

पतरातू क्षेत्र के न्यू मार्केट में ऑल इंडिया किसान सभा और विस्थापित प्रभावित युवा संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में आंदोलनकारियों ने बुधवार को झारखंड बंद के तहत प्रदर्शन किया। बंद समर्थकों ने दुकानदारों से अपने प्रतिष्ठान बंद रखने का आग्रह किया। इसके साथ ही आंदोलनकारियों, विस्थापितों, किसानों और मजदूरों के अधिकार व सम्मान की रक्षा के लिए मुख्य सड़क जाम कर विरोध जताया।
विज्ञापन


आंदोलनकारियों को सम्मान देने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने पृथक राज्य आंदोलन से जुड़े लोगों को सम्मानजनक पेंशन, राजकीय सम्मान, विशिष्ट पहचान और उनके आश्रितों को रोजगार प्रदान करने की मांग उठाई। संगठन के अध्यक्ष मनोज महतो ने कहा कि सरकार अपने पूर्व आश्वासनों तथा संकल्पों को धरातल पर कड़ाई से लागू करे। उन्होंने जेल जाने की बाध्यता खत्म करते हुए सभी आंदोलनकारियों को पेंशन देने और छूटे हुए मूल आंदोलनकारियों को चिह्नित करने के लिए आयोग के पुनर्गठन या कल्याण बोर्ड के निर्माण की मांग की।
विज्ञापन


भूमि और विस्थापितों के अधिकार
बंद समर्थकों ने जल, जंगल और जमीन की लूट रोकने तथा लैंड बैंक को तुरंत रद्द करने का मुद्दा उठाया। वक्ताओं ने लंबे समय से खेती कर रहे किसानों को भूमि का मालिकाना हक देने, तीन फसली कृषि योग्य भूमि के अधिग्रहण पर रोक लगाने और प्रभावितों को उचित मुआवजा व पुनर्वास देने की बात कही। उन्होंने वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून को सख्ती से लागू करने तथा झारखंड राज्य विस्थापन आयोग का गठन करने पर जोर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें-  झारखंड डीजीपी नियुक्ति मामला: सुप्रीम कोर्ट में नौ अक्तूबर को अगली सुनवाई, राज्य सरकार से मांगा जवाब

किसानों को 10 हजार रुपये पेंशन, भाषा और संस्कृति के संरक्षण की मांग
किसानों की आर्थिक सुरक्षा का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने 10 हजार रुपये की मासिक पेंशन, कृषि ऋण माफी, सस्ती दरों पर खाद-बीज और धान का खरीद मूल्य 3,200 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की मांग रखी।युवाओं और महिलाओं के पलायन को रोकने के उद्देश्य से खनिज आधारित उद्योग स्थापित करने, कृषि को उद्योग का दर्जा देने और प्रत्येक खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने का आग्रह किया। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय भाषा व संस्कृति की रक्षा करने, शिक्षा व स्वास्थ्य के बाजारीकरण पर रोक लगाने और भूमि अभिलेखों से छेड़छाड़ बंद करने की मांग रखी। उन्होंने ऑनलाइन प्रणाली के साथ-साथ मैनुअल रसीद काटने की प्रक्रिया जारी रखने का भी आग्रह किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed