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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष: झारखंड की महिलाएं किसी से कम नहीं, अपने कार्यों से समाज में रोशन कर रही नाम

Fri, 07 Mar 2025 08:12 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 07 Mar 2025 08:12 PM IST
सार

देश के उन्नति में जितना योगदान पुरुष का होता है उतना ही महिलाओं का भी है। वर्तमान समय में महिलाएं हर क्षेत्र में अपना और परिवार का नाम रोशन कर रही हैं। स्वामी विवेकानंद ने कहा है 'जो देश महिलाओं को उचित सम्मान नहीं देते वह आगे नहीं बढ़ पाते'। महिलाओं को समर्पित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर झारखंड की कुछ ऐसे महिलाओं से रूबरू कराने जा रहे हैं जो अपने कार्यों से समाज में कुछ अच्छा और अलग करना चाह रही है।

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International Women's Day: Jharkhand's women are making their name shine in the society with their work
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष - झारखंड की महिलाएं किसी से कम नहीं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रत्येक वर्ष 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन पूरे विश्व भर में किया जाता है यह दिन महिलाओं के अधिकारों और उपलब्धियों को सम्मान देने के लिए होता है। भारत में भी बढ़-चढ़कर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है महिलाओं के समाज के प्रति निष्ठा को दर्शाता है। महिला दिवस से यह संकेत देने की कोशिश की जाती है कि समाज और देश को विकास की ओर ले जाने में महिलाओं के साथ की जरूरत है महिला और पुरुष दोनों के बल पर ही देश विकसित होने के ओर अग्रसर होगा। देखिए झारखंड की वो महिलाएं और युवतियां जो अपने क्षेत्रों में अच्छा कार्य कर रही है।
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डॉ. आशा लाकड़ा, सदस्य, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग - झारखंड की महिलाएं आशा लाकड़ा के नाम से भली भांति परिचित हैं। खास कर आदिवासी समाज की महिलाओं के लिए वोह प्रेरणाश्रोत है। डॉ. आशा लाकड़ा अपने सरल एवम सहज व्यक्तिव के कारण राज्य एवम राष्ट्रीय पटल मे भी चर्चित नेत्री के तौर पर जानी जाती है। आशा लाकड़ा ने बेहद चुनौती पूर्ण समय में राजनीति मे कदम रखा। 2014 में पहली बार डॉ. आशा लाकड़ा रांची नगर की महापौर चुनी गईं। उसके बाद 2019 में में भी दोबारा महापौर के तौर पर उन्हें चुना गया। राजधानी की महापौर होने के साथ भाजपा में भी उनकी अच्छी पकड़ बन गई है। भाजपा की राष्ट्रीय सचिव के तौर पर भी वह काम कर चुकी है। पिछले साल 9 मार्च, 2024 को डॉ. आशा लाकड़ा को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का सदस्य चुना गया, वर्तमान समय में वह अपने दायित्व का निर्वहन सफलतापूर्वक कर रही हैं। डॉ. आशा लाकड़ा का कहना है कि सफलता पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है, बिना संघर्ष किए आप सफलता की स्वाद चख नही पाएंगे। महिलाओं को यह संदेश है कि वह अपने सपनों को साकार करें, आत्मनिर्भर बने ताकि बुरे समय में किसी के ऊपर निर्भर नहीं होना पड़े।
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मोनिका मुंडु, प्रख्यात गायिका व अभिनेत्री - झारखंड की महिलाएं हर क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रही है। संगीत की दुनिया में अपने मधुर आवाज से लोगों की दिल जीतने वाली प्रख्यात गायिका और अभिनेत्री मोनिका मुंडु उस हर महिला की आइडियल हैं। जिन्हें संगीत और फिल्मी दुनिया में कदम रखना है। 'झारखंड की स्वर कोकिला' के तौर पर मोनिका मुंडु को जाना जाता है और इनके द्वारा गाए गए गीत झारखंडी अस्मिता से ताल्लुकात रखता है। मोनिका मुंडु को झारखंड गौरव सम्मान से भी नवाजा जा चुका है, वे कुल 14 भाषाओं में गाना गा चुकी है। साल 2024 में लोक सेवा आयोग की तरफ से उन्हें झारखंड रत्न अवार्ड भी दिया गया। मोनिका मुंडु का कहना है कि, हर क्षेत्र में ही खतरा है लेकिन अगर अपने काम को सही तरीके और पूरी मेहनत के साथ किया जाए तो आप सफल जरूर होंगे। इसके साथ ही साथ राज्य में कलाकारों के भविष्य को लेकर उन्होंने कहा यहां प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन अवसर कम है, सरकार से अनुरोध है कलाकारों के सुनहरे भविष्य के लिए उचित कदम उठाया जाए।
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पूनम सिंह, समाजसेविका, संस्थापक नारी सेना - सामाजिक क्षेत्र में रांची की जाने मानी समाज सेविका पूनम देवी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। पूनम देवी अपनी संस्था नारी सेना का स्थापना कर महिलाओं से जुड़ी समस्या पर काम करती है। उन्होंने नशा मुक्ति अभियान चलाकर एक अहम भूमिका निभाई है। इसके साथ ही वे सामूहिक विवाह समारोह का भी आयोजन इनकी तरफ से किया गया है। बता दें कि, ऐसी लड़कियां जो बेहद निचले तबके से आती है या अनाथ हैं, उनकी शादी जिम्मेदारी पूनम देवी खुद उठाती हैं।

आहाना भट्टाचार्य, युवा कलाकार व समाजसेवी - आहाना भट्टाचार्य एक ऐसी युवा है जो समाज को जागरूक करने का प्रयास अपने कला के माध्यम से कम उम्र में ही करना शुरू कर चुकी हैं। उन्होंने कई ऐसे पेंटिंग की है जो लोगों को आकर्षित कर चुकी हैं। इसके साथ ही छात्राओं से जुड़ी कई समस्याओं को आहाना ने अपने कला के माध्यम से उजागर किया और उसके समाधान भी बताए ताकि छात्राएं उस समस्या से घबराये नहीं। कला के साथ-साथ आहाना समाज में चल रही कुरीतियों के खिलाफ भी अपनी आवाज बुलंद कर रही हैं। वह एक सामाजिक संस्था से भी जुड़ी हैं जिसके जरिये कई अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर वह काम करती हैं। हाल ही में उन्होंने विद्यालयों में जाकर महिलाओं से संबंधित स्वास्थ्य समस्या को लेकर समाज में जो भ्रम है। उसको लेकर छात्र और छात्राएं दोनों को जागरूक करती है। उन्होंने खुद के द्वारा बनाए गए कॉमिक के माध्यम से विधार्थियों को जानकारी देने की कोशिश भी की है। इसके साथ ही अन्य तमाम सामाजिक मुद्दों पर जागरूक करना उनका मुख्य उदेश्य है, चाहे वह बच्चियों को जागरूक करना हो या फिर किसी शिक्षक को सुझाव देना हो।
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