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पूर्व बाल मजदूर को मिला ब्रिटेन का प्रतिष्ठित डायना अवार्ड, कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन से जुड़े थे
Thu, 02 Jul 2020 03:36 PM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गिरिडीह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गिरिडीह
Published by: अनवर अंसारी
Updated Thu, 02 Jul 2020 03:36 PM IST
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नीरज मूर्मू
- फोटो : Amar Ujala
कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन (केएससीएफ) द्वारा संचालित गिरिडीह जिले के दुलियाकरम बाल मित्र ग्राम के पूर्व बाल मजदूर 21 वर्षीय नीरज मूर्मू को गरीब बच्चों को शिक्षित करने के लिए ब्रिटेन के प्रतिष्ठित डायना अवार्ड से सम्मानित किया गया है।
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इस अवार्ड से हर साल 9 से 25 साल की उम्र के उन बच्चों और युवाओं को सम्मानित किया जाता है, जिन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय देते हुए सामाजिक बदलाव में असाधारण योगदान दिया हो।
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नीरज दुनिया के उन 25 बच्चों में शामिल हैं, जिन्हें इस गौरवशाली अवार्ड से सम्मानित किया गया है। नीरज के प्रमाणपत्र में इस बात का विशेष रूप से उल्लेख है कि दुनिया बदलने की दिशा में उन्होंने नई पीढ़ी को प्रेरित और गोलबंद करने का महत्वपूर्ण काम किया है। कोरोना महामारी संकट की वजह से उन्हें यह अवार्ड डिजिटल माध्यम द्वारा आयोजित एक समारोह में प्रदान किया गया।
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गरीब आदिवासी परिवार के नीरज 10 साल की उम्र में ही परिवार का पेट पालने के लिए अभ्रक खदानों में बाल मजदूरी करने लगे। लेकिन, बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) के कार्यकर्ताओं ने जब उन्हें बाल मजदूरी से मुक्त कराया, तब उनकी दुनिया ही बदल गई। गुलामी से मुक्त होकर नीरज सत्यार्थी आंदोलन के साथ मिलकर बाल मजदूरी के खिलाफ अलख जगाने लगे।
अपनी पढ़ाई के दौरान उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझा और लोगों को समझा-बुझा कर उनके बच्चों को बाल मजदूरी से छुड़ा स्कूलों में दाखिला करने लगे। ग्रेजुएशन की पढ़ाई जारी रखते हुए उन्होंने गरीब बच्चों के लिए अपने गांव में एक स्कूल की स्थापना की है। जिसके माध्यम से वह तकरीबन 200 बच्चों को समुदाय के साथ मिलकर शिक्षित करने में जुटे हैं। नीरज ने 20 बाल मजदूरों को भी अभ्रक खदानों से मुक्त कराया है।
नीरज को डायना अवार्ड मिलने पर केएससीएफ की कार्यकारी निदेशक (प्रोग्राम) मलाथी नागासायी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहती हैं, हमें गर्व है कि नीरज ने पूर्व बाल श्रमिकों के बीच शिक्षा को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण पहल की है।
उन्होंने कहा कि वह हमारे बाल मित्र ग्राम के बच्चों के लिए एक आदर्श है, जहां का हर बच्चा अपने आप में सशक्त नेता है और अपने अधिकारों को हासिल करने के साथ-साथ अपने गांव के विकास के लिए तत्पर और संघर्षशील है।