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बच्ची की मौत, 3 राज्यों के 11 डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही के लिए FIR दर्ज
टीम डिजिटल, अमर उजाला
Updated Sat, 09 Dec 2017 12:50 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
झारखंड की राजधानी में मेडिकल नेग्लिजेंस का मामला सामने आया है। डॉक्टरों ने बिना जांच किए गलत इलाज किया जिससे 11 महीने की एक मासूम की मौत हो गई। मृतक बच्ची के पिता की शिकायत पर 11 डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया है। बच्ची के गलत इलाज के आरोपी डॉक्टरों में पांच रांची के हैं, दो कोलकाता और चार बेंगलुरू के हैं।
पिता का आरोप
झारखंड की राजधानी रांची के कोकर हैदरअली रोड के रहनेवाले विनोद कुमार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा जब उनकी 11 महीने की बच्ची की 3 अगस्त को मौत हो गई। उनका आरोप है कि, 'उनकी बच्ची को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, खाना भी नहीं खा पा रही थी। उसे दिल की बीमारी थी लेकिन डॉक्टरों ने बिना जांच कराए उसे खांसी की दवा दी। गलत इलाज के कारण उसकी मौत हो गई।'
डॉक्टरों की लापरवाही
विनोद गुप्ता के मुताबिक वे अपनी बीमार बच्ची को 21 मई को डॉ. विनोद कुमार को दिखाने गए। उन्होंने उसे सर्दी, खांसी और बुखार की दवा दी। बच्ची की हालत में सुधार नहीं हुआ, तो वे उसे डॉ. कृष्ण कुमार को दिखाने ले गए। उन्होंने भी सर्दी-खांसी की दवा दे दी। बच्ची की स्थिति में सुधार नहीं होने पर वे 17 और 19 जून को डॉ. राजेश कुमार के पास गए। डॉ. राजेश ने बच्ची को देख लिख दिया कि बच्ची ठीक है लेकिन उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ, तो वे डॉ. शैलेश चंद्रा से बच्ची का इलाज कराने पहुंचे। डॉ. शैलेश की सलाह पर बच्ची का नेबुलाइजेशन हुआ, लेकिन उसकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ। थक हार वे अपनी बीमार बच्ची को रानी चिल्ड्रेन अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने इलाज के बाद बताया कि बच्ची के हार्ट का एलवीइएफ का वैल्यू कम है।
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पिता का आरोप
झारखंड की राजधानी रांची के कोकर हैदरअली रोड के रहनेवाले विनोद कुमार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा जब उनकी 11 महीने की बच्ची की 3 अगस्त को मौत हो गई। उनका आरोप है कि, 'उनकी बच्ची को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, खाना भी नहीं खा पा रही थी। उसे दिल की बीमारी थी लेकिन डॉक्टरों ने बिना जांच कराए उसे खांसी की दवा दी। गलत इलाज के कारण उसकी मौत हो गई।'
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डॉक्टरों की लापरवाही
विनोद गुप्ता के मुताबिक वे अपनी बीमार बच्ची को 21 मई को डॉ. विनोद कुमार को दिखाने गए। उन्होंने उसे सर्दी, खांसी और बुखार की दवा दी। बच्ची की हालत में सुधार नहीं हुआ, तो वे उसे डॉ. कृष्ण कुमार को दिखाने ले गए। उन्होंने भी सर्दी-खांसी की दवा दे दी। बच्ची की स्थिति में सुधार नहीं होने पर वे 17 और 19 जून को डॉ. राजेश कुमार के पास गए। डॉ. राजेश ने बच्ची को देख लिख दिया कि बच्ची ठीक है लेकिन उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ, तो वे डॉ. शैलेश चंद्रा से बच्ची का इलाज कराने पहुंचे। डॉ. शैलेश की सलाह पर बच्ची का नेबुलाइजेशन हुआ, लेकिन उसकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ। थक हार वे अपनी बीमार बच्ची को रानी चिल्ड्रेन अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने इलाज के बाद बताया कि बच्ची के हार्ट का एलवीइएफ का वैल्यू कम है।
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3 राज्यों के 11 डॉक्टर आरोपी हैं
प्रतीकात्मक तस्वीर
रांची के बाद कोलकाता और फिर बेंगलुरू गए
जिसके बाद गुप्ता अपनी बच्ची को इलाज के लिए कोलकाता स्थित रवींद्रनाथ टैगोर इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डिएक साइंस ले गए। 24 जून को बच्ची अस्पताल में भर्ती हुई। जिसके बाद 28 जून को डॉ. विश्वजीत बंधोपध्याय ने स्थिति में सुधार बताते हुए बच्ची को अस्पताल से छुट्टी दे दी। गुप्ता बताते हैं कि 11 जुलाई को फिर बच्ची ने खाना बंद कर दिया। डॉ. विश्वजीत से बात कर वे बच्ची को फिर कोलकाता ले गए। 17 जुलाई को इलाज के बाद फिर छुट्टी दे दी गई। बच्ची की हालत में बेहतरी नहीं महसूस कर रहे विनोद गुप्ता अपनी बच्ची को बैंगलुरू के नारायण इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डिएक साइंस में ले गए। 19 जुलाई को डॉ. सुरेश ने बच्ची को भर्ती किया। वहां उसका इलाज चलता रहा। लेकिन तीन अगस्त को बच्ची की मौत हो गई।
11 आरोपी डॉक्टर
मेडिका रांची के डॉ विनोद कुमार, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ कृष्ण कुमार, रानी हॉस्पिटल के डॉ राजेश कुमार, डॉ शैलेश चंद्रा, डॉ प्रदीप कुमार जैन, रविंद्रनाथ टैगोर इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियक कोलकाता के डॉ विश्वजीत बंधोपध्याय, डॉ रीता सेनगुप्ता, नारायण इंस्टूयूट ऑफ कार्डियक सांइस बेंगलुरु के डॉ सुरेश, डॉ इदन भुटिया, डॉ अभिनव अग्रवाल, डॉ शेख आमिर, स्टाफ माधवी, गीता, शिल्पा, सौमिया, चंद्रशेखर, बिदेश चंद्र पाल के अलावा हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर और चेयरमैन।
जिसके बाद गुप्ता अपनी बच्ची को इलाज के लिए कोलकाता स्थित रवींद्रनाथ टैगोर इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डिएक साइंस ले गए। 24 जून को बच्ची अस्पताल में भर्ती हुई। जिसके बाद 28 जून को डॉ. विश्वजीत बंधोपध्याय ने स्थिति में सुधार बताते हुए बच्ची को अस्पताल से छुट्टी दे दी। गुप्ता बताते हैं कि 11 जुलाई को फिर बच्ची ने खाना बंद कर दिया। डॉ. विश्वजीत से बात कर वे बच्ची को फिर कोलकाता ले गए। 17 जुलाई को इलाज के बाद फिर छुट्टी दे दी गई। बच्ची की हालत में बेहतरी नहीं महसूस कर रहे विनोद गुप्ता अपनी बच्ची को बैंगलुरू के नारायण इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डिएक साइंस में ले गए। 19 जुलाई को डॉ. सुरेश ने बच्ची को भर्ती किया। वहां उसका इलाज चलता रहा। लेकिन तीन अगस्त को बच्ची की मौत हो गई।
11 आरोपी डॉक्टर
मेडिका रांची के डॉ विनोद कुमार, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ कृष्ण कुमार, रानी हॉस्पिटल के डॉ राजेश कुमार, डॉ शैलेश चंद्रा, डॉ प्रदीप कुमार जैन, रविंद्रनाथ टैगोर इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियक कोलकाता के डॉ विश्वजीत बंधोपध्याय, डॉ रीता सेनगुप्ता, नारायण इंस्टूयूट ऑफ कार्डियक सांइस बेंगलुरु के डॉ सुरेश, डॉ इदन भुटिया, डॉ अभिनव अग्रवाल, डॉ शेख आमिर, स्टाफ माधवी, गीता, शिल्पा, सौमिया, चंद्रशेखर, बिदेश चंद्र पाल के अलावा हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर और चेयरमैन।