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Jharkhand News: रांची में हुआ अभियंता दिवस समारोह, उत्कृष्ट अभियंताओं को किया गया सम्मानित
Mon, 15 Sep 2025 03:27 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Mon, 15 Sep 2025 03:27 PM IST
सार
रांची के शौर्य भवन में भारत रत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की 164वीं जयंती अभियंता दिवस के रूप में मनाई गई। जेईएसए द्वारा आयोजित 58वें समारोह का उद्घाटन मंत्रियों ने संयुक्त रूप से किया।
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रांची में अभियंता दिवस समारोह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी रांची के शौर्य भवन में सोमवार को भारत रत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की 164वीं जयंती को अभियंता दिवस के रूप में गरिमामय ढंग से मनाया गया। जेईएसए अध्यक्ष प्रभात कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित 58वें अभियंता दिवस समारोह का शुभारंभ ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, मंत्री योगेंद्र प्रसाद और पर्यटन एवं नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर विश्वेश्वरैया के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पांच अभियंताओं सत्येंद्र कुमार सिंह, देवाशीष लहरी, अभिनंदन कुमार, विजय शंकर और मो. जमील अख्तर को सम्मानित किया गया। साथ ही कार्यक्रम के सहयोगियों और प्रायोजकों को भी सम्मान दिया गया।
मुख्य अतिथि मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक भारत के निर्माण में इंजीनियरों की भूमिका हमेशा अहम रही है। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “आज भी तिलैया डैम जैसे दशकों पुराने निर्माण मजबूत हैं, जबकि हाल के कई स्ट्रक्चर कमजोर साबित हो रहे हैं। इंजीनियरों को टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण निर्माण पर ध्यान देना चाहिए।”
ये भी पढ़ें- Jharkhand Politics: झामुमो का पीएम मोदी पर हमला: PC में कहा- मणिपुर दौरा चुनावी साबित, जनता के दर्द की अनदेखी
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मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने इंजीनियरों को राज्य के विकास का वास्तविक निर्माता बताते हुए इंजीनियर अकादमी के गठन, जमीन उपलब्ध कराने और प्रमोशन नियमों में सुधार का आश्वासन दिया। वहीं, पर्यटन एवं नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने इंजीनियरों को “निर्माण और विकास का स्तंभ” बताते हुए कहा कि आधुनिक झारखंड के इतिहास में उनका योगदान स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा। उन्होंने सिरमटोली ब्रिज को इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
इस दौरान इंजीनियर संघ की ओर से ट्रेनिंग सेंटर, संघ के लिए जमीन और 60-40 पॉलिसी पर पुनर्विचार जैसी मांगें भी मंत्रियों के समक्ष रखी गईं। प्रधान सचिव मस्तराम मीणा ने कहा कि विश्वेश्वरैया का जीवन भले 101 वर्षों तक रहा हो, लेकिन उनकी उपलब्धियां सदैव प्रेरणास्त्रोत बनी रहेंगी। अभियंता दिवस का यह आयोजन न केवल अभियंताओं के सम्मान का प्रतीक बना, बल्कि राज्य के सर्वांगीण विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित करता रहा।
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मुख्य अतिथि मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक भारत के निर्माण में इंजीनियरों की भूमिका हमेशा अहम रही है। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “आज भी तिलैया डैम जैसे दशकों पुराने निर्माण मजबूत हैं, जबकि हाल के कई स्ट्रक्चर कमजोर साबित हो रहे हैं। इंजीनियरों को टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण निर्माण पर ध्यान देना चाहिए।”
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मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने इंजीनियरों को राज्य के विकास का वास्तविक निर्माता बताते हुए इंजीनियर अकादमी के गठन, जमीन उपलब्ध कराने और प्रमोशन नियमों में सुधार का आश्वासन दिया। वहीं, पर्यटन एवं नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने इंजीनियरों को “निर्माण और विकास का स्तंभ” बताते हुए कहा कि आधुनिक झारखंड के इतिहास में उनका योगदान स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा। उन्होंने सिरमटोली ब्रिज को इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
इस दौरान इंजीनियर संघ की ओर से ट्रेनिंग सेंटर, संघ के लिए जमीन और 60-40 पॉलिसी पर पुनर्विचार जैसी मांगें भी मंत्रियों के समक्ष रखी गईं। प्रधान सचिव मस्तराम मीणा ने कहा कि विश्वेश्वरैया का जीवन भले 101 वर्षों तक रहा हो, लेकिन उनकी उपलब्धियां सदैव प्रेरणास्त्रोत बनी रहेंगी। अभियंता दिवस का यह आयोजन न केवल अभियंताओं के सम्मान का प्रतीक बना, बल्कि राज्य के सर्वांगीण विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित करता रहा।