फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jharkhand ›   brajesh-ganjhu-tspc-chief-killed-varanasi-encounter-jharkhand-naxal-news

झारखंड: पंचायत का मुखिया बना उग्रवाद का सरगना, ऐसे खड़ा किया था टीएसपीसी का साम्राज्य; ब्रजेश गंझू की कहानी

Sun, 20 Sep 2026 02:53 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी Updated Sun, 20 Sep 2026 02:53 PM IST
सार

झारखंड के उग्रवादी संगठन टीएसपीसी के शीर्ष सरगना ब्रजेश गंझू को सुरक्षा बलों ने वाराणसी में मुठभेड़ में मार गिराया। चतरा के लावालौंग का रहने वाला ब्रजेश कभी पंचायत की राजनीति में सक्रिय था, लेकिन बाद में माओवादियों से अलग होकर टीएसपीसी का गठन कर कोयलांचल में अपना नेटवर्क खड़ा किया। पढ़ें पूरी खबर

विज्ञापन
brajesh-ganjhu-tspc-chief-killed-varanasi-encounter-jharkhand-naxal-news
बृजेश गंझू। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

झारखंड के उग्रवादी संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) के शीर्ष सरगना ब्रजेश गंझू कभी गांव की स्थानीय राजनीति से उभरा था और देखते-ही-देखते उग्रवादी संगठन के मुखिया तक पहुंच गया। वाराणसी में सुरक्षा बलों ने उसे रविवार तड़के मुठभेड़ में ढेर कर दिया।

विज्ञापन

चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र स्थित लुटू सोहावन गांव का रहने वाला ब्रजेश सिंह गंझू शुरुआत में भाकपा माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ था। वर्ष 2004-05 के दौरान वर्चस्व और आपसी मतभेदों के कारण उसने माओवादियों से अलग होकर टीएसपीसी नाम से अपना नया संगठन गठित किया। इसके बाद उसने चतरा, पलामू, लातेहार, हजारीबाग और रामगढ़ जिलों में अपने संगठन का विस्तार किया। वर्ष 2010 में उसने लावालौंग पंचायत से निर्विरोध मुखिया का चुनाव जीता था। इस प्रकार एक तरफ वह पंचायत प्रतिनिधि के रूप में सामने था, तो दूसरी तरफ उग्रवादी संगठन का संचालन कर रहा था।

विज्ञापन

ब्रजेश गंझू अपने नेटवर्क में कई छद्म नामों से जाना जाता था। उसे बृजेश जी, दुलारचंद, सरदार, रंजन जी और गोपाल सिंह भोक्ता के नाम से भी जाना जाता था। उसने बीड़ी पत्ता कारोबारियों, कोयला परियोजनाओं की आउटसोर्सिंग कंपनियों, ट्रांसपोर्टरों और स्थानीय व्यापारियों से लेवी वसूल कर एक बड़ा नेटवर्क खड़ा किया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

39 से अधिक संगीन मामले
चतरा के पुलिस अधीक्षक अनिमेष नैथानी के अनुसार, ब्रजेश गंझू के खिलाफ जिले के टंडवा, सिमरिया, लावालौंग, सदर, मयूरहंड, पत्थलगड्डा, गिद्धौर और पिपरवार थानों में हत्या, अपहरण, लेवी वसूली, आर्म्स एक्ट और यूएपीए समेत 39 से अधिक मामले दर्ज थे। वर्ष 2012 में उसके उग्रवादी दस्ते ने दो पुलिस जवानों की हत्या कर उनके हथियार लूट लिए थे। इसके बाद वर्ष 2019 के एक लेवी मामले में गवाही देने वाले व्यक्ति की हत्या का आरोप भी उस पर लगा था।

कोयला ढुलाई करने वाले वाहनों में आगजनी और वसूली के जरिये टीएसपीसी ने कोयलांचल में अपना वर्चस्व कायम रखा। संगठन की स्थापना के बाद से ही भाकपा माओवादी और टीएसपीसी के बीच इलाके में वर्चस्व की जंग चलती रही। इस हिंसक टकराव में दोनों गुटों के उग्रवादियों के साथ-साथ आम ग्रामीण भी प्रभावित हुए।

 एनआईए की टेरर फंडिंग की सूची में
ब्रजेश गंझू की उग्रवादी गतिविधियों के समानांतर उसके परिवार की राजनीतिक सक्रियता भी बनी रही। उसका भाई गणेश गंझू वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में झारखंड विकास मोर्चा के टिकट पर सिमरिया सीट से विधायक निर्वाचित हुआ था। बाद में वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गया। हालांकि, ब्रजेश के उग्रवादी रिकॉर्ड और आपराधिक पृष्ठभूमि को लेकर उठे राजनीतिक विवादों के कारण वर्ष 2019 के चुनाव में पार्टी ने गणेश गंझू को टिकट नहीं दिया।



ये भी पढ़ें- बिहार: दरवाजे पर सो रहे ग्रामीण चिकित्सक की गोली मारकर हत्या, खून से लथपथ मिला शव; तीन खोखे बरामद

दूसरी तरफ, एनआईए की टेरर फंडिंग जांच में भी ब्रजेश गंझू का नाम प्रमुखता से सामने आया था, जिसके बाद से वह एजेंसी की वांछित सूची में शामिल था। सुरक्षा बलों की निरंतर कार्रवाई से झारखंड में उग्रवादी संगठनों की गतिविधियां कमजोर पड़ रही थीं। करीब दो दशक तक कोयला क्षेत्र में समानांतर नेटवर्क चलाने वाले सबसे बड़े चेहरे के मारे जाने के बाद अब टीएसपीसी के बचे हुए ढांचे और उसके नेतृत्व पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed