झारखंड में इस बार होगा त्रिकोणीय मुकाबला
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झारखंड में इस बार कहीं भी सीधा मुकाबला नहीं है। जेवीएम ने यहां पर मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। वहीं आजयू और तृणमूल ने कुछ सीटों पर चुनाव को बहुकोणीय बना दिया है। यहां पहले चरण में 10 अप्रैल को पांच सीटों पर मतदान होना है।
पलामू, चतरा, लोहरदगा, हजारीबाग और कोडरमा में भाजपा और जेवीएम सभी चार सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं, जबकि कांग्रेस और तृणमूल दो सीटों पर मैदान में है। राजद, आजसू और माले एक-एक सीट पर भाग्य आजमा रहे हैं।
नक्सलवाद है बड़ा मुद्दा
पलामू सीट पर भाजपा ने पूर्व डीजीपी बीडी राम को मैदान में उतारा है। राम को राजद के मनोज भुईयां कड़ी टक्कर दे रहे हैं, ऊपर से जेवीएम के घुरन राम ने इस मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।
जेएमएम से तृणमूल आये पूर्व नक्सल कमांडर कामेश्वर बैठा इस बार यहां से चुनाव मैदान में हैं। नक्सल प्रभावित इस सीट पर अकाल, पलायन और नक्सलवाद जैसे मुद्दे ही वोट का आधार बनेंगे। मुकाबला काफी नजदीक का है, ऐसे में जीत का दावा हर पार्टी के समर्थक कर रहे हैं।
ना कारखाने, ना खेती लायक जमीन
चतरा सीट पर इस बार सबसे बड़ा मुद्दा स्थानीयता है। बाहरी उम्मीदवार को लेकर यहां लामबंदी हो रही है। पिछली बार यहां से सांसद बने इंदरसिंह नामधारी इस बार चुनाव मैदान में नहीं है। भाजपा ने यहां से सुनील कुमार को टिकट दिया है।
सुनील इस क्षेत्र से परिचित नहीं हैं। वैसे कांग्रेस के धीरज साहू भी इस क्षेत्र से नहीं आते हैं। साहू राज्यसभा के सदस्य रहे हैं और लोहरदगा के रहने वाले हैं। ऐसे में जेवीएम की नीलम देवी को स्थानीय होने का लाभ यहां मिल सकता है।
वैसे आजसू के नागमणि इस मुकाबले को बहुकोणीय करने का प्रयास कर रहे हैं। विकास और नक्सल जैसे मुद्दों वाले इस क्षेत्र में न तो कोई कारखाना है और न ही खेती लायक जमीन।
कई सीटों पर है त्रिकोणीय मुकाबला
ऐसे में यहां रोजगार और महंगाई के नाम पर लामबंदी जीत और हार का अंतर तय करेगी। कोडरमा सीट कहने मात्र को कोडरमा है, यहां गिरिडीह का प्रशासन ही चुनाव कराता है। चतरा की तरह यहां भी पिछली बार के विजयी उम्मीदवार इस बार मैदान में नहीं हैं।
पूर्व सांसद बाबू लाल मरांडी ने यहां से रीतलाल प्रसाद वर्मा के बेटे प्रणव कुमार वर्मा को टिकट दिया है। भाजपा की ओर से प्रदेश अध्यक्ष रबिंद्र राय यहां से मैदान में हैं।
कांग्रेस ने पूर्व सांसद तिलकधारी सिंह को मैदान में उतारा है। इस त्रिकोणीय मुकाबले को भाकपा (माले) के राजकुमार यादव ने बहुकोणीय बना दिया है। अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित लोहरदगा सीट पर भाजपा के सुदर्शन भगत के लिए इस बार राह आसान नहीं है। कांग्रेस ने यहां से पूर्व सांसद रामेश्वर उरांव को मैदान में उतारा है। पूर्व विधायक चमरा लिंडा तृणमूल से मैदान में है। जेवीएम से बीरेंद्र भगत इस मुकाबले में हैं।