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अलीमुद्दीन हत्याकांड: भाजपा नेता समेत 11 को उम्रकैद, गोमांस होने के शक में की थी हत्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रामगढ़
Updated Wed, 21 Mar 2018 09:59 PM IST
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झारखंड की एक फास्ट ट्रैक अदालत ने एक मांस विक्रेता की पीट-पीटकर हत्या के मामले में 11 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सजा पाने वालों में एक भाजपा नेता और गो रक्षक समिति के तीन सदस्य भी शामिल हैं। इस मामले में एक 16 वर्षीय नाबालिग के खिलाफ अभी मामला जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने विचाराधीन है।
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पिछले साल जून में खुद को गो रक्षक बता रही भीड़ ने गोमांस के शक में अलीमुद्दीन नाम के इस मांस विक्रेता की कार पर हमला किया था। न्यायाधीश ओम प्रकाश ने इन सभी को 16 मार्च को दोषी करार देते हुए फैसला सुरक्षित कर लिया था।
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रामगढ़ कस्बे के टांड बाजार इलाके में 29 जून, 2017 को लोगों के एक समूह ने 40 वर्षीय अलीमुद्दीन अंसारी की कार पर हमला बोल दिया था। अंसारी अपनी कार में मांस रखकर बेचने के लिए जा रहा था, जिसके गोमांस होने के शक में उस पर हमला बोला गया। बाद में फोरेंसिक जांच में भी ये गोमांस ही निकला था, जिसे बेचने पर राज्य में पाबंदी है।
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अंसारी की पत्नी मरियम खातून ने 17 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें 29 सितंबर, 2017 को पुलिस ने भाजपा के जिला मीडिया प्रवक्ता नित्यानंद महतो समेत 12 को आरोपी मानते हुए चार्जशीट दाखिल की थी। इनमें एक नाबालिग भी शामिल था।
न्यायधीश ओम प्रकाश ने इन सभी को आईपीसी की धारा 147 (दंगा), 148 (खतरनाक हथियारों से उपद्रव), 149 (गैरकानूनी समूह), 435 (बारुदी हथियारों से नुकसान पहुंचाना), 120 बी (पहले से तय साजिश के तहत अपराध करना) और 302 (हत्या) के तहत दोषी पाया था।
गो रक्षकों को देश में पहली बार सजा!
इस मामले की पैरवी कर रहे सरकारी वकील एसके शुक्ला ने दावा किया कि ये देश में गो-रक्षा के नाम पर होने वाले हमलों में सजा देने का पहला मामला है। उन्होंने बताया कि इस मामले को दुर्लभतम होने का दावा लेकर उन्होंने नाबालिग आरोपी के साथ भी बालिग की तरह व्यवहार करने की मांग जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड से की थी।
इसके लिए उन्होंने आरोपी के 16 साल से अधिक होने के चलते कानून में किए गए उस संशोधन का हवाला दिया है, जिसमें 16 से 18 वर्ष के बीच की उम्र वाले नाबालिग आरोपी के जुर्म का व्यापक प्रभाव होने की स्थिति में उसे बालिग की तरह ही माने जाने का प्रावधान किया गया है।
प्रधानमंत्री गो रक्षकों से हुए थे नाराज
बता दें कि अलीमुद्दीन की हत्या उस दिन की गई थी, जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में जगह-जगह चल रहे गो रक्षकों के उपद्रवों को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी थी। प्रधानमंत्री ने उपद्रव करने वाले गो रक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश सभी राज्यों को दिए थे।