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पत्थर नहीं गेंद उठाना चाहते हैं कश्मीर के युवा, रसिक सलाम बने कश्मीर घाटी के युवाओं के रोल मॉडल

Thu, 28 Mar 2019 07:06 AM IST
शाहरुख खान अरुण कुमार, जम्मू
अरुण कुमार, जम्मू Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 28 Mar 2019 07:06 AM IST
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youth of kashmir now want balls instead of stones in their hand, inspired with ipl ball rasikh salam
रसिख सलाम - फोटो : फाइल
आतंक के जिस गढ़ में एक आतंकी के जनाजे में भटके युवाओं का सैलाब उमड़ता है, आज उसी आतंक के गढ़ दक्षिण कश्मीर में हजारों युवा देश में उभरते गेंदबाज रसिक सलाम की ओर आशा भरी निगाहों से ताक रहे हैं। उसे रोल मॉडल मान रहे हैं।
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फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया पर उसके फॉलोअर और फैन बन रहे हैं। जाहिर है आतंक और आतंकी गतिविधि उन्हें पसंद नहीं। यहां के युवाओं की भावनाएं तात्कालिक हवाओं में बह जाती हैं।
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दक्षिण कश्मीर का कुलगाम आतंक का गढ़ माना जाता है। लेकिन कुलगाम के गांव अश्मुजी गांव का रहने वाला 17 वर्षीय रसिक सलाम ने मुंबई के वानखेडे़ तक का सफर तय किया है।
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उसने पत्थर नहीं गेंद को चुना। वह मुंबई की तरफ से इंडियन टी-20 लीग (IPL) खेल रहा है। (IPL) में डेब्यू करने के बाद रासिक सलाम राज्य के युवाओं का रोल मॉडल तो बन ही गए हैं, कश्मीर के युवा भी उन्हें रोल मॉडल मान रहे हैं। 

रसिक की फैन फॉलोइंग पिछले चार दिनों में काफी बढ़ गई है। 24 मार्च से पहले सलाम के सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर फैन फॉलोइंग तीन अंक में थी, जो वर्तमान समय में चार अंकों (हजारों) में पहुंच गई है। इसमें सबसे अधिक ट्वीट, लाइक और कमेंट करने वाले कश्मीरी युवा हैं।

... तो हर वर्ष घाटी से निकल सकते हैं रासिक और परवेज

हद तो यह है कि जहां के युवा एक आतंकी के जनाजे को वायरल कर गलत संदेश फैला कर माहौल बिगाड़ते हैं और वहीं के युवा रसिक सलाम के बारे में वीडियो बनाकर पॉजिटिव प्रतिक्रिया मांग रहे हैं। घाटी में सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में युवा रासिक की तरह क्रिकेट में अपना भविष्य बनने की इच्छा जता रहे हैं।

वीडियो में युवाओं का कहना है कि समय पर मार्गदर्शन और प्लेटफार्म मिल जाए तो कश्मीर से हर वर्ष रसिक सलाम और परवेज रसूल जैसे युवा खिलाड़ी निकलेंगे। यानी वहां हालात से युवाओं में छटपटाहट है। असामाजिक तत्व उन्हें भटका कर गलत इस्तेमाल करते हैं। 
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