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टोक्यो पैरालंपिक: हार कर भी दिल जीतने में कामयाब रहे राकेश कुमार, सिंगल में पदक की उम्मीद

Mon, 30 Aug 2021 11:46 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 30 Aug 2021 11:46 AM IST
सार

भारतीय तीरंदाज राकेश कुमार 2009 में जम्मू के नगरोटा में हुए सड़क हादसे में दिव्यांग हो गए थे। लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा। 2017 में श्राइन बोर्ड के स्पोर्ट्स स्टेडियम में तीरंदाजी शुरू की और कड़ी मेहनत से कई उच्चस्तरीय प्रतियोगिताओं में कामयाबी हासिल की। मात्र चार साल की कड़ी मेहनत के बल पर वह ओलंपिक खेलों के मंच तक पहुंचने में कामयाब रहे हैं।
 

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Tokyo Paralympics Even after losing managed to win hearts Rakesh Kumar hoping for  medal in singles
राकेश कुमार के परिजन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

टोक्यो में जारी पैरालंपिक खेलों में भारतीय तीरंदाज राकेश कुमार व ज्योति बालियान को तुर्की के खिलाड़ियों के साथ हुए युगल मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। वह युगल के क्वार्टर फाइनल मुकाबले को तीन अंक से हार गए, लेकिन दिल जीतने में कामयाब रहे। जम्मू संभाग में नताली और धर्मनगरी कटड़ा के लोगों ने अब सिंगल मुकाबले में उनके जीतने की उम्मीद जताई है। 

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राकेश कुमार के घर पर क्वार्टर फाइनल के बाद हल्की निराशा जरूर दिखी, लेकिन समर्थकों ने कहा कि प्रतियोगिता में राकेश का प्रयास सराहनीय था। इससे पहले सुबह हुए मिक्सड डबल प्री क्वार्टर फाइनल में राकेश व ज्योति की जोड़ी ने थाईलैंड की टीम को पांच अंकों से हराया था। दोपहर तक खुशी का माहौल था। वहीं, बाद में हुए क्वार्टर फाइनल में उनकी हार के बाद प्रशंसकों में मायूसी देखने को मिली।
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सिंगल में पदक की उम्मीद
तीरंदाज राकेश कुमार के परिजनों को उम्मीद है कि वह सिंगल मुकाबले में पदक जीतने में कामयाब रहेंगे। वह क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुके हैं, जहां उनका मुकाबला मंगलवार सुबह 10:46 बजे स्लोवाकिया के खिलाड़ी से होगा। राकेश की माता दर्शना देवी, पिता प्रीतम चंद, पत्नी ज्योति देवी व भाई दीप कुमार का कहना है कि उनका निजी स्तर पर प्रदर्शन उच्चस्तर का रहा है। इस कारण पूरी उम्मीद है कि वह सिंगल पदक जीतने में जरूर कामयाब होंगे।

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