नेशनल गर्ल्स चाइल्ड डे 2020: परिवार की गरीबी भी नहीं रोक सकी इन बेटियों के बुलंद हौसलों की उड़ान
भारत में हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। नेशनल गर्ल्स चाइल्ड डे मनाने का मकसद देश में लड़कियों के प्रति भेदभाव के प्रति एक अभियान चलाना है। साथ ही बेटियों के अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक करना है। साल 2008 में भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने नेशनल गर्ल्स चाइल्ड डे मनाने की शुरुआत की थी।
एक तरफ हमारे देश में जहां महिलाओं को देवियों का दर्जा दिया जाता है। वहीं कहीं ना कहीं लड़कियों के साथ भेदभाव और मूलभूत अधिकारों से वंचित भी रखा जाता रहा है। चाहे वो शिक्षा का अधिकार हो या फिर सुरक्षा या सम्मान।
हालांकि, मौजूदा समय में हालात और लोगों की सोच बदली है, आज बेटियां और महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। ऐसे ही दो मिसालें गरीब परिवारों की गुड्डी और अंजू हैं। दोनों के ही पिता मजदूरी करते हैं। इसके बाद भी दोनों लगातार अपनी मेहनत और लगन से अपने परिवार का नाम रोशन कर रही हैं।
गुड्डी ने जूडो में संभागीय स्तर पर हिस्सा लेकर कई मेडल अपने नाम किए हैं। वह पढ़ाई में भी काफी अच्छा कर रही है। उसका कहना है कि वह इसी तरह मेहनत करती रहेगी और एक दिन अपने परिवार का नाम अवश्य रोशन करेगी। गुड्डी डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना चाहती है। वहीं गुड्डी डांस भी काफी अच्छा करती है। उसने रेडक्रॉस के कार्यक्रमों में कई बार डांस प्रस्तुत कर सभी का दिल जीता है।
सातवीं की छात्रा अंजू ने जूडो में राष्ट्रीय स्तर पर खेलो इंडिया में हिस्सा लेकर गोल्ड मेडल हासिल किया है। अंजू के पिता मजदूरी करते हैं। अंजू मेहनत-लगन करके अपने परिवार का नाम रोशन करना चाहती है। खासतौर पर अपने माता-पिता का, जिन्होंने हर मोड़ पर उसका साथ दिया। अंजू का कहना है कि वह भविष्य में आगे चलकर जूडो ट्रेनर बनना चाहती है।