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महबूबा मुफ्ती ने अलगाववादियों को फिर लताड़ा, कहा- भारत महान लोकतंत्र
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Fri, 01 Jul 2016 11:47 AM IST
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विधानसभा में बोलतीं महबूबा मुफ्ती
- फोटो : Amar Ujala
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने वीरवार को एक बार फिर अलगाववादियों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हिंसा से न अतीत में कुछ हासिल हुआ है और न ही भविष्य में कुछ हासिल होगा। पांपोर हमले के संबंध में उन्होंने कहा कि रमजान के महीने में हत्याएं करने वाले इस पवित्र महीने का अनादर कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत एक महान लोकतंत्र है और जितनी आजादी अपने मन की करने की यहां है इतनी किसी अन्य लोकतांत्रिक देश में भी नहीं। वीरवार को विधानसभा में बजट सत्र के आखिरी दिन महबूबा ने एक बार फिर दोहराया कि रियासत में शांति और खुशहाली के लिए पाकिस्तान के साथ सार्थक वार्ता जरूरी है।
उन्होंने कहा कि दोनों परमाणु संपन्न राष्ट्र हैं। ऐसे में युद्ध मसले का हल नहीं हो सकता। दोनों देशों को मिल बैठकर मतभेद सुलझाने होंगे। कहा कि गठबंधन सरकार के एजेंडा आफ अलायंस में भारत-पाक वार्ता का विंदु शामिल है। उन्होंने कहा कि वह रियासत के लोगों को खून खराबे से बाहर निकालना चाहती हैं।
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उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भारत में संसदीय प्रणाली की सराहना की थी और कहा था कि तमाम चुनौैतियों के बावजूद भारत लोकतांत्रिक परंपराओं के कारण फल फूल रहा है।।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत एक महान लोकतंत्र है और जितनी आजादी अपने मन की करने की यहां है इतनी किसी अन्य लोकतांत्रिक देश में भी नहीं। वीरवार को विधानसभा में बजट सत्र के आखिरी दिन महबूबा ने एक बार फिर दोहराया कि रियासत में शांति और खुशहाली के लिए पाकिस्तान के साथ सार्थक वार्ता जरूरी है।
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उन्होंने कहा कि दोनों परमाणु संपन्न राष्ट्र हैं। ऐसे में युद्ध मसले का हल नहीं हो सकता। दोनों देशों को मिल बैठकर मतभेद सुलझाने होंगे। कहा कि गठबंधन सरकार के एजेंडा आफ अलायंस में भारत-पाक वार्ता का विंदु शामिल है। उन्होंने कहा कि वह रियासत के लोगों को खून खराबे से बाहर निकालना चाहती हैं।
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उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भारत में संसदीय प्रणाली की सराहना की थी और कहा था कि तमाम चुनौैतियों के बावजूद भारत लोकतांत्रिक परंपराओं के कारण फल फूल रहा है।।
सीआरपीएफ के जवानों पर गर्व
जम्मू-कश्मीर विधानसभा
- फोटो : Nikhil Mehta
उन्होंने कहा साल 2002 में उनके पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद के राज्य के मुख्यमंत्री रहते हुए दोनों देशों में बातचीत का दौर शुरू हुआ था। पीडीपी की अगुवाई वाली सरकार के जाने के बाद इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई। ऐसे में विपक्ष हमें यह न याद दिलाए कि हमने क्या किया।
पिछले छह दशकों से भारत-पाक में जम्मू कश्मीर को लेकर झगड़ा चल रहा है। इस वजह से जम्मू कश्मीर के लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है। उन्होंने कहा एसआरओ 105 मामले पर भाजपा नेताओं ने सबसे पहले आवाज बुलंद की क्योंकि उन्हें जम्मू-कश्मीर के कल्याण की चिंता है। कहा कि भाजपा सदस्यों ने सांप्रदायिक तनाव पर चिंता जताई है, इसलिए उन्हें भी इस दिशा में प्रयास जारी रखने चाहिए।
उन्होंने कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हमलों की निंदा करते हुए कहा कि दुनिया में इससे गलत संदेश जाता है। कहा कि चाहे सीआरपीएफ का जवान मरे या नागरिक या फिर आतंकी उससे उसके परिवार व समाज को दर्द होता है। उन्होंने कहा कि उन्हें मुस्लिम होने पर गर्व है।
सरकार ने सुरक्षा बलों को अधिकतम संयम बरतने के निर्देश दिए हुए हैं। इसी वजह से सीआरपीएफ के आठ जवानों के आतंकी हमले में मौत के बावजूद वहां स्थिति नियंत्रण से बाहर नहीं हुई। मुझे उन सीआरपीएफ के जवानों पर गर्व हैं जिन्होंने जम्मू-कश्मीर के नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपनी जान का बलिदान दिया।
विधायक निजी जिंदगियों पर चर्चा न करें
विधानसभा में सीनियर आईएएस अफसर के आत्महत्या का प्रयास करने पर हुई चर्चा पर कहा कि विधायकों को नशाखोरी से युवाओं को दूर रखने जैसे मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए न कि निजी जिंदगियों पर। महबूबा ने अपने भाषण में बजट सत्र के कवरेज के लिए मीडिया की भूमिका को भी सराहा।
पिछले छह दशकों से भारत-पाक में जम्मू कश्मीर को लेकर झगड़ा चल रहा है। इस वजह से जम्मू कश्मीर के लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है। उन्होंने कहा एसआरओ 105 मामले पर भाजपा नेताओं ने सबसे पहले आवाज बुलंद की क्योंकि उन्हें जम्मू-कश्मीर के कल्याण की चिंता है। कहा कि भाजपा सदस्यों ने सांप्रदायिक तनाव पर चिंता जताई है, इसलिए उन्हें भी इस दिशा में प्रयास जारी रखने चाहिए।
उन्होंने कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हमलों की निंदा करते हुए कहा कि दुनिया में इससे गलत संदेश जाता है। कहा कि चाहे सीआरपीएफ का जवान मरे या नागरिक या फिर आतंकी उससे उसके परिवार व समाज को दर्द होता है। उन्होंने कहा कि उन्हें मुस्लिम होने पर गर्व है।
सरकार ने सुरक्षा बलों को अधिकतम संयम बरतने के निर्देश दिए हुए हैं। इसी वजह से सीआरपीएफ के आठ जवानों के आतंकी हमले में मौत के बावजूद वहां स्थिति नियंत्रण से बाहर नहीं हुई। मुझे उन सीआरपीएफ के जवानों पर गर्व हैं जिन्होंने जम्मू-कश्मीर के नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपनी जान का बलिदान दिया।
विधायक निजी जिंदगियों पर चर्चा न करें
विधानसभा में सीनियर आईएएस अफसर के आत्महत्या का प्रयास करने पर हुई चर्चा पर कहा कि विधायकों को नशाखोरी से युवाओं को दूर रखने जैसे मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए न कि निजी जिंदगियों पर। महबूबा ने अपने भाषण में बजट सत्र के कवरेज के लिए मीडिया की भूमिका को भी सराहा।