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खेल की दुनिया में लोहा मनवा रहीं जम्मू-कश्मीर की बेटियां, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर जीते स्वर्ण
Wed, 27 Nov 2019 07:24 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Wed, 27 Nov 2019 07:24 PM IST
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शिवानी, सुविधा, बवलीन कौर
- फोटो : अमर उजाला
जम्मू-कश्मीर की लड़कियां वैसे तो हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं। अब इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए ये मेधावी लड़कियां खेल के क्षेत्र में भी खूब नाम कमा रही हैं। पर्याप्त संसाधन व मौकों में अभाव के बावजूद प्रदेश की लड़कियां हर खेल में अपनी मेहनत और कौशल के दम पर पदक जीत रही हैं।
रिदमिक जिम्नास्टिक में जम्मू के बख्शीनगर की 16 वर्षीय बवलीन कौर का प्रदर्शन उनकी प्रतिभा को बयां करता है। बवलीन ने हाल ही में आगरा में हुई स्कूल गेम्स प्रतियोगिता में रिदमिक जिम्नास्टिक वर्ग में पांच स्वर्ण पदक जीते थे। इससे पहले खेलो इंडिया के दूसरे ऑडिशन में तीन गोल्ड और तीन सिल्वर पदक जीते थे। अगले वर्ष जनवरी में होने वाले खेलो इंडिया गेम्स के लिए उनका चयन भी हुआ है।
बवलीन ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के खेल ढांचे में कमी है, लेकिन पिछले कुछ समय से इसमें काफी बदलाव आया है। अब कोच भी अच्छे मिलते हैं, जो काफी अच्छा प्रशिक्षण देते हैं। उन्होंने कहा कि एमए स्टेडियम के इंडोर हॉल में जिम्नास्टिक और बैडमिंटन का कॉमन हॉल है जिसमें खिलाड़ी प्रैक्टिस करते हैं। अगर जिम्नास्टिक के लिए अलग हॉल होता तो अच्छे से प्रशिक्षण कर सकते थे। स्पोर्ट्स कोटे में नौकरी मिलने से खिलाड़ियों में भविष्य को लेकर एक उम्मीद जगती है।
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रिदमिक जिम्नास्टिक में जम्मू के बख्शीनगर की 16 वर्षीय बवलीन कौर का प्रदर्शन उनकी प्रतिभा को बयां करता है। बवलीन ने हाल ही में आगरा में हुई स्कूल गेम्स प्रतियोगिता में रिदमिक जिम्नास्टिक वर्ग में पांच स्वर्ण पदक जीते थे। इससे पहले खेलो इंडिया के दूसरे ऑडिशन में तीन गोल्ड और तीन सिल्वर पदक जीते थे। अगले वर्ष जनवरी में होने वाले खेलो इंडिया गेम्स के लिए उनका चयन भी हुआ है।
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बवलीन ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के खेल ढांचे में कमी है, लेकिन पिछले कुछ समय से इसमें काफी बदलाव आया है। अब कोच भी अच्छे मिलते हैं, जो काफी अच्छा प्रशिक्षण देते हैं। उन्होंने कहा कि एमए स्टेडियम के इंडोर हॉल में जिम्नास्टिक और बैडमिंटन का कॉमन हॉल है जिसमें खिलाड़ी प्रैक्टिस करते हैं। अगर जिम्नास्टिक के लिए अलग हॉल होता तो अच्छे से प्रशिक्षण कर सकते थे। स्पोर्ट्स कोटे में नौकरी मिलने से खिलाड़ियों में भविष्य को लेकर एक उम्मीद जगती है।
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देश की शीर्ष महिला पर्वतारोही प्रदेश की शिवानी चाढ़क की प्रतिभा किसी से छुपी नहीं है। 18 वर्ष की शिवानी ने अपने करियर में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में काफी नाम कमाया है। शिवानी ने बताया कि उन्होंने छह सुपर नेशनल खेले हैं। इसके अलावा पिछले कुछ वर्ष में उन्होंने ओपन नेशनल में भी भाग लिया है।
वर्तमान में शिवानी एशियन यूथ चैंपियनशिप के लिए बंगलुरू में हैं। यहां शिवानी राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष होने वाले ओलंपिक्स क्वालीफायर इवेंट के लिए तैयारी करनी है, लेकिन जम्मू में प्रशिक्षण की पर्याप्त सुविधा ना होने के कारण शहर छोड़कर बाहर जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स कोटे में नौकरी मिलनी चाहिए जिससे उनका मनोबल बढ़ेगा।
पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी अपनी प्रतिभा से प्रदेश का नाम रोशन करने वाली सुविधा सरन ने रोलबॉल में अपने छोटे से करियर में प्रदेश टीम की कप्तान बनने के साथ ही चार राष्ट्रीय और दो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं भी खेली हैं। हाल ही में संपन्न हुए रोलबॉल वर्ल्डकप में राष्ट्रीय टीम ने सिल्वर पदक जीता था। सुविधा इस टीम का अहम हिस्सा थीं।
बीटेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की छात्रा सुविधा ने कहा कि पढ़ाई के साथ खेल में अपने प्रदर्शन को अच्छा बनाए रखना बहुत चुनौतीपूर्ण होता है। मैं 17 वर्ष से स्केटिंग कर रही थी। इसके साथ ही मैंने रोलर हॉकी में भी दो राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं खेली हैं। पिछले ढाई साल से रोलबॉल खेल रही हूं। सुविधा का मानना है कि जम्मू के स्पोर्ट्स ढांचे में कमी तो है। उन्होंने बताया कि एमए स्टेडियम में एक कॉमन रिंग है इसमें रोल स्केटिंग के साथ रोलबॉल भी खेला जाता है। अगर अलग-अलग रिंग होते तो हम ज्यादा अच्छी तरह से प्रैक्टिस कर पाते, जिससे हमारे खेल में सुधार होता।
वर्तमान में शिवानी एशियन यूथ चैंपियनशिप के लिए बंगलुरू में हैं। यहां शिवानी राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष होने वाले ओलंपिक्स क्वालीफायर इवेंट के लिए तैयारी करनी है, लेकिन जम्मू में प्रशिक्षण की पर्याप्त सुविधा ना होने के कारण शहर छोड़कर बाहर जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स कोटे में नौकरी मिलनी चाहिए जिससे उनका मनोबल बढ़ेगा।
पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी अपनी प्रतिभा से प्रदेश का नाम रोशन करने वाली सुविधा सरन ने रोलबॉल में अपने छोटे से करियर में प्रदेश टीम की कप्तान बनने के साथ ही चार राष्ट्रीय और दो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं भी खेली हैं। हाल ही में संपन्न हुए रोलबॉल वर्ल्डकप में राष्ट्रीय टीम ने सिल्वर पदक जीता था। सुविधा इस टीम का अहम हिस्सा थीं।
बीटेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की छात्रा सुविधा ने कहा कि पढ़ाई के साथ खेल में अपने प्रदर्शन को अच्छा बनाए रखना बहुत चुनौतीपूर्ण होता है। मैं 17 वर्ष से स्केटिंग कर रही थी। इसके साथ ही मैंने रोलर हॉकी में भी दो राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं खेली हैं। पिछले ढाई साल से रोलबॉल खेल रही हूं। सुविधा का मानना है कि जम्मू के स्पोर्ट्स ढांचे में कमी तो है। उन्होंने बताया कि एमए स्टेडियम में एक कॉमन रिंग है इसमें रोल स्केटिंग के साथ रोलबॉल भी खेला जाता है। अगर अलग-अलग रिंग होते तो हम ज्यादा अच्छी तरह से प्रैक्टिस कर पाते, जिससे हमारे खेल में सुधार होता।