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सिर्फ भाजपा ही सुलझा सकती है कश्मीर मसला, विपक्ष करेगा पूरा समर्थन: आजाद
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Wed, 31 Aug 2016 10:09 PM IST
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गुलाम नवी आजाद
- फोटो : amar ujala
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कश्मीर घाटी में कर्फ्यू तो हटा लिया गया है लेकिन हिंसा की घटनाएं अभी भी जारी है। घाटी के हालात पर चर्चा के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद भी श्रीनगर पहुंचे हैं।
श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए रियासत के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कश्मीर मसले का समाधान सिर्फ भाजपा ही कर सकती है और विपक्षा उनका पूरा समर्थन करेगा।
उन्होंने आगे कहा कि पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने जब-जब कश्मीर मसले का हल करना चाहा और उसके लिए फार्मूला पेश किया तब-तब भाजपा ने उसका विरोध किया। मौजूदा समय में केंद्र और राज्य दोनों जगहों पर भाजपा की सरकार है इसलिए वह कश्मीर मसले का बेहतर समाधान निकाल सकती है।
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श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए रियासत के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कश्मीर मसले का समाधान सिर्फ भाजपा ही कर सकती है और विपक्षा उनका पूरा समर्थन करेगा।
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उन्होंने आगे कहा कि पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने जब-जब कश्मीर मसले का हल करना चाहा और उसके लिए फार्मूला पेश किया तब-तब भाजपा ने उसका विरोध किया। मौजूदा समय में केंद्र और राज्य दोनों जगहों पर भाजपा की सरकार है इसलिए वह कश्मीर मसले का बेहतर समाधान निकाल सकती है।
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हालात सुधारने के लिए जल्द से जल्द शुरू हो बातचीत
kashmir
- फोटो : PTI
उन्होंने कहा कि अगर आल पार्टी डेलिगेशन को पहले बुलाया जाता और सभी पक्षों से बातचीत की जाती तो कर्फ्यू 12 दिनों में ही हट जाता और इतने लोगों की जान नहीं जाती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने संसद तथा सर्वदलीय बैठक दोनों में कहा था कि यदि सरकार जमीनी स्तर पर सुधार चाहती है तो जल्द से जल्द बातचीत की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
इस वजह से बातचीत को केवल मुख्यधारा की पार्टियों तक ही सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। रियासत ही नहीं, बल्कि देशभर में मुख्यधारा से हटकर भी कुछ पार्टियां हैं, जिनका विधानसभाओं तथा संसद में प्रतिनिधित्व नहीं है।
गौरतलब है कि आठ जुलाई को हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से हिंसा जारी है। इस हिंसा में अब तक 6000 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं।
इस वजह से बातचीत को केवल मुख्यधारा की पार्टियों तक ही सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। रियासत ही नहीं, बल्कि देशभर में मुख्यधारा से हटकर भी कुछ पार्टियां हैं, जिनका विधानसभाओं तथा संसद में प्रतिनिधित्व नहीं है।
गौरतलब है कि आठ जुलाई को हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से हिंसा जारी है। इस हिंसा में अब तक 6000 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं।