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J&K: देश के अलग-अलग हिस्सों में डुग्गर संस्कृति की छटा बिखेर रही "सरस
amarujala.com- Presented by: चंद्रा पाण्डेय
Updated Sun, 05 Nov 2017 07:33 PM IST
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सरस भारती
- फोटो : फाइल फोटो
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उधमपुर जिले के रामनगर से सटा एक छोटा सा गांव अमरोह है। यहां के निवासी रूमालो राम की 24 वर्षीय बेटी सरस भारती दुनिया के सामने डुग्गर संस्कृति की छटा बिखरने का काम कर रही हैं। लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत सरस ने अपने पिता और परिवार से प्रेरणा लेकर खुद का एक ग्रुप तैयार किया है।
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लोक गायकी और लोकनृत्य में वैसे भी बेटियों की भागीदारी काफी कम रही है। सरस ने इसे चैलेंज की तरह लिया। उन्होंने अब तक न सिर्फ कई युवतियों को डुग्गर लोक गायकी की अलग-अलग विधाओं-गीतडू, भाख, कारकें, सोहाग गीत से और लोकनृत्य से जोड़ा, वरन दुनिया के सामने डुग्गर संस्कृति का लोहा भी मनवाया है।
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सरस ने रियासत के प्रसिद्ध कटड़ा महोत्सव, जम्मू महोत्सव के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इस रास्ते में मुश्किलें भी कम नहीं हैं। सरस भारती का परिवार जहां उनका पूरा समर्थन करता है, वहीं अन्य बेटियों को परिवार का समर्थन हासिल करने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
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कई बार उनको परिवार की नाराजगी भी झेलनी पड़ती है। खासकर जब वे राज्य से बाहर परफार्म करने की अनुमति चाहती हैं। हालांकि इससे सरस निराश नहीं होती हैं। उनका कहना है कि एक दिन ऐसा भी आएगा, जब लोकसंस्कृति की छटा बिखेरनी में जुटीं बेटियाें पर उनके परिवार को गर्व होगा।
सरस ने महिला डिग्री कॉलेज गांधीनगर से उन्होंने 2016 में म्यूजिक में एमए किया। साइंस कॉलेज जम्मू में होने वाले सालाना जलसे ‘अपने देश को जानो’ में जब उन्होंने अपने साथियों के साथ डोगरी लोक संस्कृति पर प्रस्तुति दी तो खूब वाहवाही मिली।
सरस ने दिल्ली में आयोजित पर्यटन पर्व में अपने पिता रूमालो राम के साथ राष्ट्रीय स्तर पर डोगरी संस्कृति की प्रस्तुति देने का मौका मिला। उन्होंने दिल्ली में आर्ट आफ लिविंग के वर्ल्ड कल्चरल फेस्टिवल में भी परफार्म किया है।