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कनव ने बिना कोचिंग और सेल्फ स्टडी कर केएएस में हासिल किया 34वां रैंक
Tue, 13 Aug 2019 12:58 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Tue, 13 Aug 2019 12:58 AM IST
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कनव महाजन
- फोटो : अमर उजाला
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कहते हैं अगर हौसले बुलंद हों, तो कोई भी काम मुश्किल नहीं रह जाता। इसे सच साबित कर दिखाया है कनव महाजन ने। इन्होंने हाल में पीएससी द्वारा घोषित जम्मू-कश्मीर एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (केएएस) परिणाम में 34वां रैंक हासिल किया है।
केएएस परीक्षा को पहली बार में पास करने वाले कनव बताते हैं कि उन्होंने केएएस परीक्षा की तैयारी सेल्फ स्टडीज द्वारा की। इसके लिए दिन में 8-10 घंटे पढ़ते थे।
उन्होंने बताया कि जब मेरी केएएस मेन की परीक्षा चल रही थी, तब मेरे पिता का निधन हो गया। इसके बाद खुद को संभालाना मेरे लिए बहुत मुश्किल था। पिता के निधन के दो दिन बाद मेरी केएएस मेन की परीक्षा थी, जो बहुत खराब गई। फिर मैंने अगले और आखिरी परीक्षा के लिए खुद को तैयार किया और परीक्षा दी। इसके लिए कभी कोई कोचिंग भी नहीं ली। इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं और 2015 में पीएचई विभाग में बतौर जूनियर इंजीनियर काम भी कर चुके हैं।
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कनव ने 2016 में पीडब्लूडी में बतौर असिस्टेंट इंजीनियर काम भी किया है। कनव ने बताया कि जो कहते हैं कि इंजीनियर बैकग्राउंड के लोग कभी केएएस नहीं कर सकते हैं, उन्हें मैं कहना चाहूंगा कि केएएस इंजीनियरिंग बैकग्रांउड के लोग भी कर सकते हैं।
अगर मैं कभी केएएस परीक्षा में सफल नहीं हो पाता, तो मैं केएएस का सपना देखने वाले विद्यार्थियों को कोचिंग देता। कनव ने बताया कि वह अब भी हर उस विद्यार्थी की मदद करेंगे, जो केएएस बनना चाहते हैं। कनव अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य को देते हैं।
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केएएस परीक्षा को पहली बार में पास करने वाले कनव बताते हैं कि उन्होंने केएएस परीक्षा की तैयारी सेल्फ स्टडीज द्वारा की। इसके लिए दिन में 8-10 घंटे पढ़ते थे।
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उन्होंने बताया कि जब मेरी केएएस मेन की परीक्षा चल रही थी, तब मेरे पिता का निधन हो गया। इसके बाद खुद को संभालाना मेरे लिए बहुत मुश्किल था। पिता के निधन के दो दिन बाद मेरी केएएस मेन की परीक्षा थी, जो बहुत खराब गई। फिर मैंने अगले और आखिरी परीक्षा के लिए खुद को तैयार किया और परीक्षा दी। इसके लिए कभी कोई कोचिंग भी नहीं ली। इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं और 2015 में पीएचई विभाग में बतौर जूनियर इंजीनियर काम भी कर चुके हैं।
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कनव ने 2016 में पीडब्लूडी में बतौर असिस्टेंट इंजीनियर काम भी किया है। कनव ने बताया कि जो कहते हैं कि इंजीनियर बैकग्राउंड के लोग कभी केएएस नहीं कर सकते हैं, उन्हें मैं कहना चाहूंगा कि केएएस इंजीनियरिंग बैकग्रांउड के लोग भी कर सकते हैं।
अगर मैं कभी केएएस परीक्षा में सफल नहीं हो पाता, तो मैं केएएस का सपना देखने वाले विद्यार्थियों को कोचिंग देता। कनव ने बताया कि वह अब भी हर उस विद्यार्थी की मदद करेंगे, जो केएएस बनना चाहते हैं। कनव अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य को देते हैं।