त्रासदी के छह सालः सद्दल के 132 विस्थापितों को नहीं मिला आशियाना, कुछ ऐसे बसर हो रही जिंदगी

शेर सिंह, अमर उजाला, उधमपुर Updated Sun, 06 Sep 2020 05:16 PM IST
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सद्दल गांव के विस्थापित परिवार
सद्दल गांव के विस्थापित परिवार - फोटो : अमर उजाला

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त्रासदी के छह वर्ष बाद भी सद्दल गांव के 132 विस्थापित परिवारों को आशियाना नहीं मिला है। अप्रैल 2020 में सरकार ने विस्थापित परिवारों को लीज पर पांच मरले जमीन पर मकान बनाकर देने के आदेश जारी किए, लेकिन अभी तक इसको लेकर कुछ नहीं हो सका है। इनमें से 45 परिवार छह वर्ष से सुई इलाके में आपदा प्रबंधन की इमारत के अंदर जीवन व्यतीत कर रहे हैं। जबकि 87 परिवार पंजर पंचायत में सरकारी राहत का इंतजार कर रहे हैं। विस्थापित परिवारों का कहना है कि छह सितंबर 2014 की सुबह उनको आज भी याद है जब पलक झपकते ही पूरा गांव मलबे में तब्दील हो गया था और 40 लोग दफन हो गए थे।
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छह सितंबर 2014 की सुबह केवल सद्दल ही नहीं बल्कि पूरे जिले के लोगों को याद है, जब भारी बारिश के दौरान मोंगरी तहसील के पंजर पंचायत में सद्दल गांव का अस्तित्व भूस्खलन होने पर मिट गया था। इसमें 40 लोग जिंदा दफन हो गए। अभी भी कुछ शवों की तलाश जारी है। एक पल में 132 परिवार पूरी तरह से बेघर हो गए। लोगों को अपने घरों के अंदर से जरूरत का सामान निकालने का भी समय नहीं मिला। एक पल में 132 परिवारों के जीवन में जीवन में तूफान आ गया। सरकार व प्रशासन ने इन परिवारों को हर संभव सहायता का आश्वसन दिया। इनको पंजर में ही टेंट लगाकर दे दिए गए।
सद्दल, पंजर व कसूरी बसने को नहीं है सुरक्षित
त्रासदी के दो महीने के बाद एक एनजीओ ने पंजर में लोगों के अस्थायी ढांचा तैयार करने के लिए काम शुरू किया। इसी बीच जियोलॉजी सर्वे आफ इंडिया की टीम मौके पर पहुंची और सर्वे में पता चला कि सद्दल, पंजर और कसूरी इलाका बसने के लिए सुरखित नहीं है। इसलिए को बीच में ही बंद कर दिया गया और प्रशासन ने दूसरे स्थान पर बसाने की योजना पर काम करना शुरू कर दिया।
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