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एक नहर ने बदल दी किसानों की किस्मत

Sun, 12 Jun 2016 01:55 PM IST
संजीव दुबे, अमर उजाला/जम्मू
संजीव दुबे, अमर उजाला/जम्मू Updated Sun, 12 Jun 2016 01:55 PM IST
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A canal changed the fate of farmers
जम्मू, आरएसपुरा, बिश्नाह और सांबा के कंडी इलाकों के लोगों के सूखे कंठ तर करने और कृषि क्षेत्र के लिए बनाई गई ऐतिहासिक रणबीर नहर एक मिसाल है। महाराजा प्रताप सिंह ने अपने पिता महाराजा रणवीर सिंह की स्मृति में इस नहर का निर्माण कराया। इसके निर्माण में पूरे 20 साल लगे। इसकी खासियत यह है कि इसको साइफन सिस्टम के जरिए तवी नदी की तलहटी के नीचे से निकाला गया है।
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सन 1885 में अखनूर से गहरी नाली खोदने के साथ इसकी शुरुआत हुई और 1905 में निर्माण पूरा हुआ। सिंचाई विभाग जम्मू के अधिकारी लालमण शर्मा ने बताया कि 1880 तक जम्मू, आरएसपुरा, बिश्नाह, सांबा की जनता केवल बारिश के पानी पर निर्भर थी। बारिश कम होती थी तो तालाब तक सूख जाते थे।
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ऐसे में महाराजा प्रताप सिंह ने अखनूर में चिनाब दरिया का पानी कंडी इलाकों में पहुंचाने का संकल्प लिया था। कुछ किलोमीटर तक जब गहरी नाली का प्रयास सफल रहा तो महाराजा ने इसे नहर का रूप दिलवाया।
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उस समय उन्होंने विदेशों से इंजीनियरों को बुलाकर नहर की डिजीइन बनवाई। तवी नदी के नीचे करीब तीन सौ मीटर लंबी अंडर ग्राउंड नहर निकाली गई। इस नहर से आरएसपुरा, बिश्नाह, सांबा के करीब 400 गांवों तक सिंचाई का पानी पहुंच गया। तवी नदी से अंडर ग्राउंड नहर को निकालने के लिए तांबे के ढोलों का प्रयोग किया गया।

नहर का इस्तेमाल परिवहन के तौर पर भी होता था

A canal changed the fate of farmers
नहर - फोटो : Demo Pic.
रणवीर नहर का इस्तेमाल महाराजा के शासन काल में पेयजल और सिंचाई के परिवहन के तौर भी होता था। इसमें नावें अखनूर के गुढ़ा पत्तन तक जाती थीं। व्यापारी और महाराजा के मुलाजिम इस नहर के जरिए सामान एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाते थे। महाराजा स्वयं भी सप्ताह में एक बार नाव का इस्तेमाल करते थे। 

नहरी में गंदगी फेंकने पर मिलता था कड़ा दंड
 महाराजा के शासनकाल में नहर बेहद साफ सुथरी थी। किसी को भी नहर में गंदगी डालने की अनुमति नहीं थी। इसके लिए महाराजा ने निगरानी तंत्र को मजबूत बना रखा था और बाकायदा मुलाजिमों के लिए क्वार्टर नहरों के किनारे बनवाए गए थे। अगर कोई नहर में किसी तरह की गंदगी डालता दिखता तो उसे कड़ा दंड दिया जाता था। नहर में नहाना यहां तक की पांव तक धोने की मनाही थी। 

सिंचाई विभाग भी महाराजा की दूरदर्शिता का कायल
सिंचाई विभाग में अधिकारी लालमन शर्मा ने कहा कि विभाग महाराजा की दूरदर्शिता का कायल है। अधिकारियों की मानें तो महाराजा की सोच ने पूरे जम्मू की तस्वीर बदलकर रख दी। 1994 में तवी में अंडर ग्राउंड नहर को बाढ़ से नुकसान पहुंचने के बाद इसके साथ नई नहर बनाकर सिंचाई की व्यवस्था जारी रखी गई।

इसके बाद विभाग की ओर से राजन इरिगेशन लिफ्ट योजना पर काम हुआ लेकिन वह रणवीर नहर की तरह सफल नहीं हो पाई। शर्मा के पिता स्वर्गीय छज्जू राम महाराजा के शासन काल में रणवीर नहर में गेज रीडर का काम करते थे।
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