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राहत कैंप में दिन गुजारने को मजबूर ग्रामीण
ब्यूरो/अमर उजाला, सांबा
Updated Mon, 13 Oct 2014 01:25 AM IST
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जिला के सीमावर्ती गांव रिगाल के ग्रामीण पलायन कर मदून के तरेली के पंचायत घर में अपने दिन गुजार रहे हैं। ग्रामीणों को अपने बच्चाें की शिक्षा प्रभावित होने की चिंता सता रही है। उनकी धान की फसल खेतों में बर्बाद हो रही है। इसके चलते किसानों को अपने परिवार को पालने की चिंता बनी हुई है।
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महिला निशा देवी, शीलो देवी, नीलम, सुरेष्टा देवी, अंजु देवी आदि ने बताया कि उनका गांव रिगाल जीरो लाइन से 700 मीटर की दूरी पर है। इस समय वे विस्थापित होकर मदून के पंचायत घर में दिन गुजार रहे हैं। उनके बच्चों की शिक्षा के लिए कोई प्रबंध नहीं किए गए हैं, दूसरी ओर उनकी धान की फसल खेतों में बर्बाद हो रही है। इस बारे में आज तक उनको किसी भी मंत्री या नेता ने कोई आश्वासन नहीं दिया।
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बच्चों का भविष्य चौपट हो रहा है, लेकिन उनकी शिक्षा के लिए सरकार समेत सभी नेता और मंत्री चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने बताया कि आज जब वे लोग अपने गांव गए, तो देखा कि पाक द्वारा दागे गए मोर्टार के गोलों से उनकी धान की फसल बर्बाद हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी तक उनको कोई मुआवजा नहीं दिया है, जबकि राजनीतिक दल उन पर भी सियासत कर रहे हैं।
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विस्थापितों ने बताया कि रविवार को उनके शिविर में एक मंत्री उनसे मिलने पहुंचे। वे यहां बच्चों को एक-एक पैकेट बिस्कुट और फ्रूटी बांटकर चले गए। मंत्री जी के इस व्यवहार से महिलाओं में खासा रोष था। उन्हें यह अपमान लगा, लेकिन वे अपने दर्द को बयां नहीं कर सकीं। उन्होंने कहा कि उन पर दुखों का पहाड़ टूटा है और राजनेता उनका मजाक उड़ा रहे हैं।
पाकिस्तानी गोलाबारी से सीमावर्ती गांवों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। घरबार छोड़कर स्कूली बच्चों घरवालों के साथ शिविरों में रहने को मजबूर हैं। इससे उनकी पढ़ाई छूट जाती है। जिन हाथों में कापी किताब होनी चाहिए उन्हें पाकिस्तानी गोलों से दरबदर होना पड़ रहा है। बार-बार पलायन और गोलाबारी के साये में जीने को मजबूर इन बच्चों के दिमाग पर भी विपरती असर पड़ता है।
पाकिस्तान द्वारा दागे गए मोर्टार के शेलों के खोल इन बच्चों के हाथों में दिख रहे हैं। शिविरों में ठहरे रिगाल गांव के बच्चों ने बताया कि वह स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। बच्चों का कहना है कि उन्हें पढ़ाई की चिंता है। उन्होंने बताया उनकी परीक्षाएं भी आने वाली हैं। पढ़ाई नहीं कर पाने से वह पिछड़ जाएंगे।
अपने गांव से विस्थापित होकर राहत शिविर में रह रहे लोगों ने रियासत और केंद्र सरकार से मांग की है कि उन्हें सुरक्षित स्थानों पर प्लाट मुहैया करवाए जाएं। गोलाबारी में बर्बाद हुई फसल के लिए भी लोगों ने मुआवजा दिए जाने की मांग की है।