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जम्मू: अंडर ट्रायल कैदी को नहीं लगेगी हथकड़ी
जम्मू/ब्यूरो
Updated Sat, 30 Mar 2013 11:29 AM IST
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अंडर ट्रायल कैदियों को अब अदालत में पेशी के लिए ले जाने के क्रम में हथकड़ी नहीं पहनाई जाएगी। इस संबंध में मिले कई आवेदनों पर गौर करते हुए प्रधान सत्र न्यायाधीश करतार सिंह ने डीजीपी को संविधान और सुप्रीम कोर्ट के उन आदेशों का पालन सख्ती से करने के आदेश दिए, जिसमें अंडर ट्रायल को हथकड़ी नहीं लगाकर कोर्ट में पेश करने को कहा गया है।
कोर्ट में दाखिल आवेदनों में कहा गया कि देश में कानून है कि अंडर ट्रायल को हथकड़ी लगाकर कोर्ट में पेश करना संविधान की धारा 21 का उल्लंघन है। अंडर ट्रायल को हथकड़ी लगाना अमानवीय और सिविल सोसायटी के खिलाफ है। इसके बावजूद अंडर ट्रायल कैदियों को कोर्ट में हथकड़ी लगाकर पेश किया जा रहा है। पुलिस एजेंसियां इस कानून को नजर अंदाज कर रही हैं या फिर जानबूझकर ऐसा कर रही हैं, जिससे मानव अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।
इस कानून से अनभिज्ञता का कोई भी बहाना नहीं बन सकता है, क्योंकि पुलिस का प्रोसेक्यूटिंग विंग हमेशा उन्हें गाइड करता है। प्रोसेक्यूटिंग विंग को इस कानून की भलीभांति जानकारी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई केसों में आरोपियों को हथकड़ी लगाने या नहीं लगाने की गाइड लाइन जारी की है।
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प्रधान न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पूछा कि क्यों हथकड़ी मामले के कानून को हवा में उड़ा दिया गया। सुप्रीम कोर्ट कई बार कोर्ट या किसी भी न्यायिक मजिस्ट्रेट से अनुमति लेने के बाद हथकड़ी लगाने की गाइड लाइन दे चुका है।
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कोर्ट में दाखिल आवेदनों में कहा गया कि देश में कानून है कि अंडर ट्रायल को हथकड़ी लगाकर कोर्ट में पेश करना संविधान की धारा 21 का उल्लंघन है। अंडर ट्रायल को हथकड़ी लगाना अमानवीय और सिविल सोसायटी के खिलाफ है। इसके बावजूद अंडर ट्रायल कैदियों को कोर्ट में हथकड़ी लगाकर पेश किया जा रहा है। पुलिस एजेंसियां इस कानून को नजर अंदाज कर रही हैं या फिर जानबूझकर ऐसा कर रही हैं, जिससे मानव अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।
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इस कानून से अनभिज्ञता का कोई भी बहाना नहीं बन सकता है, क्योंकि पुलिस का प्रोसेक्यूटिंग विंग हमेशा उन्हें गाइड करता है। प्रोसेक्यूटिंग विंग को इस कानून की भलीभांति जानकारी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई केसों में आरोपियों को हथकड़ी लगाने या नहीं लगाने की गाइड लाइन जारी की है।
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प्रधान न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पूछा कि क्यों हथकड़ी मामले के कानून को हवा में उड़ा दिया गया। सुप्रीम कोर्ट कई बार कोर्ट या किसी भी न्यायिक मजिस्ट्रेट से अनुमति लेने के बाद हथकड़ी लगाने की गाइड लाइन दे चुका है।