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डीआरडीओ प्रदर्शनी में दिखी देश की ताकत
Jammu
Updated Wed, 05 Feb 2014 05:43 AM IST
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जम्मू। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) की प्रदर्शनी को लेकर वैज्ञानिकों के साथ-साथ छात्रों और युवाओं में खासा उत्साह है। हलका लड़ाकू विमान तेजस, मल्टी मिशन मानव रहित विमान निशांत, पायलट रहित टारगेट एयरक्राफ्ट, स्वचालित अंडर वाटर व्हीकल, एईडब्ल्यूएंड सी तकनीक, रडार तकनीक समेत मिसाइल, रात को देख सकने वाले यंत्र, बुलेट प्रूफ जैकेट, ब्लास्टिक हेलमेट, ब्लास्ट प्रोटेक्शन सूट, ‘वेपन लोकेटिंग रडार’ और अन्य चीजें खासतौर पर आकर्षण का केंद्र रहे। तेजस कैसा लड़ाकू विमान है, निशांत और लक्ष्य किस प्रकार से काम करते हैं, आदि सवाल थे, जिनका उत्तर स्टाल पर उपस्थित अधिकारी दे रहे थे। डीआरडीओ में भर्ती कैसे होती है, इसकी जानकारी भी छात्र उत्सुकता से ले रहे थे। डीआरडीओ की प्रदर्शनी के बाहर टारपीडो भी रखा गया है। टारपीडो किस प्रकार से काम करता है, की जानकारी वीडियो क्लीपिंग से दी जा रही है। इसके अलावा स्वदेशी मिसाइलों अग्नि, पृथ्वी, नाग, आकाश और ब्रह्मोस के माडल भी खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
बुलेट प्रूफ जैकेट के बारे में मिली जानकारी
प्रदर्शनी में रखी गई माडुलर बुलेट प्रूफ जैकेट भी छात्रों के लिए खास उत्सुकता का विषय रही। क्या यह जैकेट एके 47 की गोली रोक सकती है, अगर रोक सकती है तो कितनी दूरी तक, इसका भार कितना है, सेना में यह जैकेट कब शामिल होगी, क्या हम इसे छू कर देख सकते हैं, ऐसे सवाल थे जो छात्र पूछ रहे थे।
टारपीडो को धोखा देने में माहिर है ‘मारीच’
साइसं कांग्रेस के दौरान लगी डीआरडीओ की प्रदर्शनी में ‘मारीच’ नाम का अस्त्र खास आकर्षण का केंद्र रहा। ‘मारीच’ के साथ स्टाल पर उपस्थित अधिकारियों का कहना था कि जिस प्रकार से रामायण में ‘मारीच’ ने हिरण का स्वरूप बदल कर मां सीता को धोखा दिया, ठीक उसी प्रकार से ‘मारीच’ टारपीडो को धोखा देता है। जब दुश्मन का टारपीडो हमारे जहाज को निशाना बना कर आगे बढ़ता आता है तो उस समय जहाज में दस से पंद्रह के बीच ‘मारीच’ अस्त्र लांच किए जाते हैं। ‘मारीच’ ठीक एक ऐसा आभास तैयार करता है जो किसी जहाज की तरह होता है। यही ‘मारीच’ की रणनीति है। टारपीडो ‘मारीच’ द्वारा बनाए गए जाल में फंस जाता है और ‘मारीच’ द्वारा तैयार किए गए आभासी जहाज को निशाना बनाता है, जिससे अपना जहाज बच जाता है।
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बुलेट प्रूफ जैकेट के बारे में मिली जानकारी
प्रदर्शनी में रखी गई माडुलर बुलेट प्रूफ जैकेट भी छात्रों के लिए खास उत्सुकता का विषय रही। क्या यह जैकेट एके 47 की गोली रोक सकती है, अगर रोक सकती है तो कितनी दूरी तक, इसका भार कितना है, सेना में यह जैकेट कब शामिल होगी, क्या हम इसे छू कर देख सकते हैं, ऐसे सवाल थे जो छात्र पूछ रहे थे।
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टारपीडो को धोखा देने में माहिर है ‘मारीच’
साइसं कांग्रेस के दौरान लगी डीआरडीओ की प्रदर्शनी में ‘मारीच’ नाम का अस्त्र खास आकर्षण का केंद्र रहा। ‘मारीच’ के साथ स्टाल पर उपस्थित अधिकारियों का कहना था कि जिस प्रकार से रामायण में ‘मारीच’ ने हिरण का स्वरूप बदल कर मां सीता को धोखा दिया, ठीक उसी प्रकार से ‘मारीच’ टारपीडो को धोखा देता है। जब दुश्मन का टारपीडो हमारे जहाज को निशाना बना कर आगे बढ़ता आता है तो उस समय जहाज में दस से पंद्रह के बीच ‘मारीच’ अस्त्र लांच किए जाते हैं। ‘मारीच’ ठीक एक ऐसा आभास तैयार करता है जो किसी जहाज की तरह होता है। यही ‘मारीच’ की रणनीति है। टारपीडो ‘मारीच’ द्वारा बनाए गए जाल में फंस जाता है और ‘मारीच’ द्वारा तैयार किए गए आभासी जहाज को निशाना बनाता है, जिससे अपना जहाज बच जाता है।
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