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पथरीले रास्ते पर चल कर जाते हैं शिक्षा ग्रहण करने
पुंछ/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 05 Jan 2016 01:00 AM IST
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भारत पाक नियंत्रण रेखा से सटे गांव कीरनी के बच्चे पथरीले रास्ते से गुजरकर शिक्षा ग्रहण क रने जाते हैं। उन्हें रोजाना कई किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता है।
इसके बाद वह स्कूलों तक पहुंच पाते हैं। इन रास्तों पर गिरकर बच्चे अक्सर चोटिल हो जाते हैं। एक सप्ताह पहले स्कूल से घर लौटते समय रास्ते में गिकर हाथ की हड्डी तुड़वा चुके वसीम का कहना है कि हमारे गांव के लिए सड़क बनाने के लिए विस्फोट कर पहाड़ों को तोड़ा गया था।
सड़क तो आज तक नहीं बन सकी पर पूरा रास्ता बडे़ बडे़ पत्थरों और चटानों से भर गया। हम बच्चों को इसी रास्ते से आना-जाना पड़ता है जिससे मेरी तरह आए दिन कोई न कोई बच्चा घायल हो जाता है।
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गांव कीरनी निवासी मोहम्मद माशूक, सफदर अहमद, मोहम्मद साजिद का कहना है कि करीब एक दशक पूर्व गांव तक सड़क बनाने का काम शुरू हुआ था परन्तू काम के चींटी की चल के चलते हमारे लिए घरों तक आने के लिए जो पगडंडी थी, वह भी खत्म हो गई है और हमें आवाजाही करने के लिए मिला है।
पथरीला रास्ता जो कि हम लोगों के साथ हमारे बच्चों के लिए परेशानियों का सबब बन गया है। उन्होंने सरकार और विभाग से सड़क बनाने की मांग पुरजोर तरीके से की है।
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इसके बाद वह स्कूलों तक पहुंच पाते हैं। इन रास्तों पर गिरकर बच्चे अक्सर चोटिल हो जाते हैं। एक सप्ताह पहले स्कूल से घर लौटते समय रास्ते में गिकर हाथ की हड्डी तुड़वा चुके वसीम का कहना है कि हमारे गांव के लिए सड़क बनाने के लिए विस्फोट कर पहाड़ों को तोड़ा गया था।
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सड़क तो आज तक नहीं बन सकी पर पूरा रास्ता बडे़ बडे़ पत्थरों और चटानों से भर गया। हम बच्चों को इसी रास्ते से आना-जाना पड़ता है जिससे मेरी तरह आए दिन कोई न कोई बच्चा घायल हो जाता है।
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गांव कीरनी निवासी मोहम्मद माशूक, सफदर अहमद, मोहम्मद साजिद का कहना है कि करीब एक दशक पूर्व गांव तक सड़क बनाने का काम शुरू हुआ था परन्तू काम के चींटी की चल के चलते हमारे लिए घरों तक आने के लिए जो पगडंडी थी, वह भी खत्म हो गई है और हमें आवाजाही करने के लिए मिला है।
पथरीला रास्ता जो कि हम लोगों के साथ हमारे बच्चों के लिए परेशानियों का सबब बन गया है। उन्होंने सरकार और विभाग से सड़क बनाने की मांग पुरजोर तरीके से की है।