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मेंढर में पहाड़ियों ने जनजाति का दर्जा देने की मांग को लेकर किया प्रदर्शन
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पुंछ। मेंढर में पहाड़ी भाषियों को जनजाति का दर्जा देने की मांग को लेकर पहाड़ियों ने रविवार को प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार से पहाड़ियों की मांगों को जल्दी पूरा करने का आग्रह किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय गृृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि उन्होंने पहाड़ियों के साथ हमदर्दी दिखाते हुए जनजाति का दर्जा दर्जा देने की बात की है। वरर्ना सत्तर वर्ष से जो लोग सत्ता में रहे हैं, उन्होंने पहाड़ियों के साथ नाइंसाफी ही की है।
दोपहर को मेंढर में पहाड़ी भाषियों ने सतीश कुमार, देविन्द्र टंडन, कफील खान, संदीप कुमार, इसरार खान और रवींद्र सिंह की अगुवाई में पहाड़ियों को जनजाति का दर्जा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मांगों के पक्ष में नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सात दशक से केंद्र एवं राज्य में सत्ता भोग रहे दलों ने पहाड़ी और गूजर दो भाइयों को बांटने का काम किया है। 35 वर्ष पहले जब जनजाति का दर्जा देने के लिए दोनों भाईयों की फाईलें गई थी तो एक भाई को तो उसका हक दे दिया गया परन्तू हमें छोड़ दिया गया ऐसे में हम लोग बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। पहाड़ियों का विकास नहीं हो पाया है। हमारे पढ़े लिखे बच्चे बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। जो नौकरी कर रहे हैं उनको पदोन्नति नहीं मिल पा रही है। क्योंकि जनजाति का दर्जा न होने के कारण हम हर क्षेत्र में पिछड़ रहे हैं।
इस अवसर पर देवेंद्र टंडन और कफील खान ने पहाड़ियों को जनजाति का दर्जा दिए जाने का विरोध करने विरोध करने वालों को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब उनको जनजाति का दर्जा दिया गया था तो हमने उनका साथ दिया, लेकिन अब वो हमारा विरोध कर रहे हैं। हम जिसकी निंदा करते हैं। हम सरकार से अपना हक मांग रहे हैं न कि किसी के हक से हिस्सा मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार जल्दी ही पहाड़ियों की मांगें पूरी करती है तो पहाड़ी जनजाति के लोग भी सरकार का हर कदम पर साथ देंगे।
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दोपहर को मेंढर में पहाड़ी भाषियों ने सतीश कुमार, देविन्द्र टंडन, कफील खान, संदीप कुमार, इसरार खान और रवींद्र सिंह की अगुवाई में पहाड़ियों को जनजाति का दर्जा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मांगों के पक्ष में नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सात दशक से केंद्र एवं राज्य में सत्ता भोग रहे दलों ने पहाड़ी और गूजर दो भाइयों को बांटने का काम किया है। 35 वर्ष पहले जब जनजाति का दर्जा देने के लिए दोनों भाईयों की फाईलें गई थी तो एक भाई को तो उसका हक दे दिया गया परन्तू हमें छोड़ दिया गया ऐसे में हम लोग बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। पहाड़ियों का विकास नहीं हो पाया है। हमारे पढ़े लिखे बच्चे बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। जो नौकरी कर रहे हैं उनको पदोन्नति नहीं मिल पा रही है। क्योंकि जनजाति का दर्जा न होने के कारण हम हर क्षेत्र में पिछड़ रहे हैं।
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इस अवसर पर देवेंद्र टंडन और कफील खान ने पहाड़ियों को जनजाति का दर्जा दिए जाने का विरोध करने विरोध करने वालों को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब उनको जनजाति का दर्जा दिया गया था तो हमने उनका साथ दिया, लेकिन अब वो हमारा विरोध कर रहे हैं। हम जिसकी निंदा करते हैं। हम सरकार से अपना हक मांग रहे हैं न कि किसी के हक से हिस्सा मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार जल्दी ही पहाड़ियों की मांगें पूरी करती है तो पहाड़ी जनजाति के लोग भी सरकार का हर कदम पर साथ देंगे।
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