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पाकिस्तानी महिला खतीजा बेगम को भारतीय नागरिकता मिलने के बाद कई ओर महिलाओं को बंधी आस,आतंकी बनने गए दर्जनों युवकों के साथ शादी कर
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पुंछ के गांव मरहोट में अपने पति व चार बच्चों के साथ पी ओ के से विवाह कर आई सफिया बी जिसे भारतीय नागर
- फोटो : POONCH
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पुंछ। 36 वर्ष से नगर के मोहल्ला शंकर नगर वार्ड-11 में ससुराल में रह रही पाकिस्तान के अटक में जन्मी खतीजा बेगम को भारतीय नागरिकता मिलने के बाद जहां उसके परिवार और रिश्तेदारों में खुशी है। वहीं खतीजा बेगम को नागरिकता मिलने के बाद जिले में रह रही नियंत्रण रेखा के उस पार से आई कई और महिलाओं को आस बंध गई है कि अब उन्हें और उनके बच्चों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाएगी। वर्षों से जिले में ससुराल में रह रही ऐसी दर्जनों महिलाओं और उनके बच्चों को भारतीय नागरिकता न मिलने के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद शुरू होने के बाद जिले में उस पार से आए आतंकियों द्वारा जिले के सैकड़ों युवाओं को बरगला कर नियंत्रण रेखा के उस पार आतंकी शिविरों में प्रशिक्षण हेतु ले जाया गया था, जिनमें बड़ी संख्या में जिले के उस पार गए युवाओं ने वहां की युवतियों से विवाह कर उस घर बसा लिए। कुछ वर्ष बाद ऐसे युवा अपने साथ पत्नियों और बच्चोें के साथ वतन लौट आए। आत्म समर्पण के सजा काटने के बाद यह लोग रिहा होने के बाद परिवार के साथ रह रहे हैं।
पंचायती चुनाव के दौरान सावजियां गांव में वर्षों से रह रही नोरीन अख्तर ने सरपंच पद के लिए नामांकन भरा। उसका नामांकन रद्द कर दिया गया क्योंकि उसके पास भारतीय नागरिकता नहीं है। सुरनकोट तहसील के दूरदराज के गांव मरहोट में वर्ष 2011 में पति मुश्ताक अहमद के साथ चार बच्चों सहित ससुराल लौटी सफिया बी का कहना है कि इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी हमें नागरिकता नहीं मिली है। हमारे पास कोई प्रमाणपत्र ही नहीं है, जिसके कारण हम जिले के बाहर आ जा भी नहीं सकते। मेरे बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिला तक नहीं मिल पा रहा है। अगर भारतीय नागरिकता मिल जाए तो हमारा जीवन सुधर जाएगा।
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गौरतलब है कि पुंछ में पीओके से आई दर्जनों महिलाएं भारतीय नागरिकता मिलने का इंतजार कर रही हैं। वहीं कश्मीर घाटी में ऐसी महिलाओं की संख्या सैकड़ों में है जो उस पार दहशतगर्दी फैलाने का प्रशिक्षण लेने गए युवाओं से शादी कर इस पार आ बसी हैं और भारतीय नागरिकता मिलने का इंतजार कर रही हैं।
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गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद शुरू होने के बाद जिले में उस पार से आए आतंकियों द्वारा जिले के सैकड़ों युवाओं को बरगला कर नियंत्रण रेखा के उस पार आतंकी शिविरों में प्रशिक्षण हेतु ले जाया गया था, जिनमें बड़ी संख्या में जिले के उस पार गए युवाओं ने वहां की युवतियों से विवाह कर उस घर बसा लिए। कुछ वर्ष बाद ऐसे युवा अपने साथ पत्नियों और बच्चोें के साथ वतन लौट आए। आत्म समर्पण के सजा काटने के बाद यह लोग रिहा होने के बाद परिवार के साथ रह रहे हैं।
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पंचायती चुनाव के दौरान सावजियां गांव में वर्षों से रह रही नोरीन अख्तर ने सरपंच पद के लिए नामांकन भरा। उसका नामांकन रद्द कर दिया गया क्योंकि उसके पास भारतीय नागरिकता नहीं है। सुरनकोट तहसील के दूरदराज के गांव मरहोट में वर्ष 2011 में पति मुश्ताक अहमद के साथ चार बच्चों सहित ससुराल लौटी सफिया बी का कहना है कि इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी हमें नागरिकता नहीं मिली है। हमारे पास कोई प्रमाणपत्र ही नहीं है, जिसके कारण हम जिले के बाहर आ जा भी नहीं सकते। मेरे बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिला तक नहीं मिल पा रहा है। अगर भारतीय नागरिकता मिल जाए तो हमारा जीवन सुधर जाएगा।
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गौरतलब है कि पुंछ में पीओके से आई दर्जनों महिलाएं भारतीय नागरिकता मिलने का इंतजार कर रही हैं। वहीं कश्मीर घाटी में ऐसी महिलाओं की संख्या सैकड़ों में है जो उस पार दहशतगर्दी फैलाने का प्रशिक्षण लेने गए युवाओं से शादी कर इस पार आ बसी हैं और भारतीय नागरिकता मिलने का इंतजार कर रही हैं।